कंचे वाला बादशाह

Best Moral Story For Kids In Hindi : गली का चैंपियन

बिरपुरा गाँव की कच्ची गलियों में शाम होते ही बच्चों की चहचहाहट गूंजने लगती थी। उन्हीं गलियों में रहता था एक 11 साल का लड़का — राजू। साँवला रंग, चमकती आँखें और चेहरे पर हमेशा मुस्कान। उसके पापा खेतों में काम करते थे और माँ सिलाई कर घर का खर्च चलाती थीं।

राजू की दुनिया बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन उसके सपने बहुत ऊँचे थे। उसके पास खिलौने नहीं थे, लेकिन एक चीज़ थी, जो उसके लिए सबसे खास थी — कंचे। रंग-बिरंगे, छोटे-छोटे गोल कंचे जिनमें वह अपनी पूरी दुनिया देखता था।

हर शाम गली में कंचों का मुकाबला होता था। गाँव के सभी बच्चे इकट्ठा होते और कंचे फेंकने की बाज़ी शुरू होती। राजू हर बार जीतता था। उसकी उँगलियों की चपलता, उसकी निशाने की ताकत, और उसकी आँखों की एकाग्रता अद्भुत थी।

सब बच्चे उसे “कंचों का राजा” कहने लगे थे, लेकिन राजू के लिए उसकी सबसे बड़ी दौलत था उसका नीला कंचा — जिसे वह “लकी कंचा” कहता था। वह कहता, “जब भी ये कंचा चलता है, किस्मत पलट जाती है।”



Best Moral Story For Kids In Hindi : अर्जुन की एंट्री

एक दिन स्कूल में एक नया लड़का आया — अर्जुन। वह शहर से आया था। उसके पास चमकदार जूते, रंगीन बैग और एक डिजिटल घड़ी थी। बाकी बच्चे उसकी ओर खिंचे चले गए। वह बोलता भी अंग्रेज़ी में था, और उसकी अकड़ साफ दिखती थी।

“तुम लोग अब भी कंचे खेलते हो?” उसने हँसते हुए कहा। “शहर में तो हम वीडियो गेम्स और स्केट बोर्ड चलाते हैं।”

राजू चुपचाप उसे देखता रहा। वह जानता था कि अर्जुन में कुछ खास है, लेकिन उसमें नम्रता नहीं थी।

अर्जुन ने देखा कि सब बच्चे राजू को बहुत मानते हैं। उसने राजू को चुनौती दे दी, “अगर तुम इतने ही अच्छे खिलाड़ी हो, तो मुझसे मुकाबला करो।”

राजू मुस्कराया, “ठीक है, इस शनिवार स्कूल के मैदान में। तुम और मैं — कंचों की बाज़ी!”



Best Moral Story For Kids In Hindi : मुकाबले की तैयारी

राजू जानता था कि ये केवल एक खेल नहीं है, ये सम्मान की लड़ाई थी। वह हर शाम और भी ज्यादा अभ्यास करने लगा। माँ ने उसकी हथेली की जलन पर हल्दी लगाई और कहा, “बेटा, खेल में हार-जीत होती रहती है, पर इज़्ज़त अपने व्यवहार से बनती है।”

दूसरी ओर अर्जुन अपने चमकीले नए कंचों के साथ स्टाइल से चलता, लेकिन अभ्यास कम करता। वह सोचता कि राजू एक मामूली गाँव का लड़का है, जो उससे जीत नहीं सकता।

शनिवार आया। स्कूल का मैदान बच्चों से भर गया। मास्टर जी भी वहाँ खड़े थे। पूरा गाँव इस मुकाबले को देखने आया था। दोनों खिलाड़ी सामने थे — एक गाँव का सीधा-सादा राजू, और एक शहर का अकड़ू अर्जुन।

पहला राउंड — अर्जुन ने एक ही निशाने में दो कंचे गिरा दिए। तालियाँ बज उठीं।

दूसरा राउंड — राजू ने कोशिश की, पर अर्जुन ने उसे मात दे दी।

अब तक अर्जुन दो राउंड जीत चुका था। बच्चे चुप हो गए, लेकिन राजू शांत था।



Best Moral Story For Kids In Hindi : जीत का रास्ता

तीसरा राउंड शुरू हुआ। राजू ने जेब से अपना लकी कंचा निकाला। उसने आँखें बंद कीं, गहरी साँस ली और ज़मीन पर झुका।

“ठक!” — एक कंचा गिरा। फिर दूसरा… फिर तीसरा… और सब दंग रह गए! राजू ने एक ही निशाने में चार कंचे गिरा दिए।

अब स्कोर था 2-1।

चौथा राउंड में अर्जुन थोड़ा घबराया हुआ लगा। उसका निशाना चूका। राजू ने संयम से खेला और यह राउंड भी जीत लिया।

फाइनल राउंड आया। मैदान में सन्नाटा था। राजू ने अर्जुन की ओर देखा, मुस्कराया और कहा, “चलो, आखिरी राउंड दोस्ती का हो। जीत कोई भी जाए, मुस्कराहट दोनों की रहे।”

अर्जुन पहली बार थोड़ी नम्रता से मुस्कराया।

राजू ने अपना आखिरी कंचा चलाया — और सीधा निशाना! बच्चे उछल पड़े — “राजू जीत गया!”



Best Moral Story For Kids In Hindi : सच्चा बादशाह

अर्जुन चुपचाप खड़ा था। राजू उसके पास गया और अपना लकी कंचा उसकी ओर बढ़ाया।

“ये ले। ये मेरा सबसे प्यारा कंचा है। तुझे जीतने से ज्यादा, दोस्ती देना अच्छा लगता है।”

अर्जुन ने कंचा हाथ में लिया, फिर झुककर राजू को गले लगा लिया। “तुम सच्चे बादशाह हो, राजू।”

उस दिन के बाद अर्जुन गाँव के बच्चों में घुल-मिल गया। उसने राजू से विनम्रता सीखी और राजू ने अर्जुन से तकनीकें सीखीं। दोनों ने मिलकर बच्चों को एक नया खेल सिखाया — जिसमें दोस्ती भी थी और प्रतियोगिता भी।

राजू ने साबित कर दिया कि सच्ची जीत सिर्फ स्कोर से नहीं, संस्कार से होती है।


कहानी से सीख

अहंकार कभी टिकता नहीं।

मेहनत और नम्रता हमेशा जीत दिलाती है।

असली बादशाह वह है, जो हारकर भी मुस्कराए और जीतकर भी बाँट दे।


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