अंधेरे का श्राप

गाँव ‘कालीपुर’ अपनी भयानक कहानियों के लिए जाना जाता था। लोग कहते थे कि इस गाँव के पास स्थित ‘अंधेरे का वन’ श्रापित है। कोई भी व्यक्ति अगर रात के समय उस जंगल में जाता, तो वापस नहीं लौटता।

Image generated by meta.ai

गाँव के ही एक युवक, रोहन, को इन कहानियों पर विश्वास नहीं था। वह एक पढ़ा-लिखा लड़का था और इन सब बातों को कोरी अफवाह मानता था। उसने ठान लिया कि वह इस रहस्य को उजागर करेगा।

रहस्यमयी जंगल की ओर

एक रात, चाँदनी की हल्की रोशनी में, रोहन अपने दोस्त समीर के साथ जंगल की ओर बढ़ा। उसके हाथ में एक टॉर्च और मोबाइल था। जैसे ही वे जंगल में घुसे, चारों ओर सन्नाटा छा गया। हवा भी जैसे थम गई हो।

चलते-चलते उन्हें पेड़ों के बीच अजीब आकृतियाँ दिखने लगीं। टॉर्च की रोशनी डालते ही वे आकृतियाँ गायब हो जातीं।

अचानक समीर को महसूस हुआ कि कोई उनके पीछे चल रहा है। उसने रोहन को इस बारे में बताया, लेकिन रोहन हँस पड़ा, “डर मत, यह तुम्हारा वहम है।”

Image generated by meta.ai

शापित हवेली

जंगल के बीच उन्हें एक पुरानी हवेली दिखी, जो आधी टूटी हुई थी। हवेली के दरवाजे पर खून के धब्बे थे, और अंदर से किसी के कराहने की आवाज़ आ रही थी।

“क्या तुम्हें भी आवाज़ सुनाई दी?” समीर ने घबराकर पूछा।

“हाँ,” रोहन ने धीमी आवाज़ में जवाब दिया।

वे अंदर गए। हवेली की दीवारों पर अजीब चित्र बने हुए थे, जिनमें लोगों की दर्दनाक मौत दिखाई गई थी।

डरावनी परछाइयाँ

अचानक एक ठंडी हवा का झोंका आया और दरवाजा अपने आप बंद हो गया। रोहन और समीर ने मुड़कर देखा, तो दरवाजे के पास एक काली परछाईं खड़ी थी। वह धीरे-धीरे उनकी ओर बढ़ने लगी।

“भागो!” समीर चिल्लाया।

दोनों ने भागने की कोशिश की, लेकिन उनके पैर जैसे भारी हो गए थे। परछाईं की आँखें लाल हो गईं और उसके मुँह से अजीब-सी फुसफुसाहट निकली, “तुमने यहाँ आने की हिम्मत कैसे की? अब तुम भी इस श्राप के शिकार बनोगे।”

खौफनाक सच्चाई

रोहन ने हिम्मत जुटाकर पूछा, “तुम कौन हो?”

परछाईं ने एक डरावनी हँसी हँसी और बोली, “मैं उन आत्माओं का राजा हूँ, जो इस श्रापित जंगल में मारी गईं। सौ साल पहले इस गाँव के लोगों ने एक निर्दोष औरत पर जादू टोने का आरोप लगाकर उसे जला दिया था। मरते समय उसने श्राप दिया कि जो भी इस जंगल में आएगा, वह कभी वापस नहीं जा पाएगा।”

रोहन और समीर काँपने लगे।

बचने की कोशिश

रोहन ने अपने बैग से गंगाजल की बोतल निकाली और परछाईं पर छिड़क दी। एक भयंकर चीख गूंजी और हवेली में आग लग गई।

वे किसी तरह दरवाजा खोलकर बाहर निकले और जंगल से भागे।

Image generated by meta.ai

अगली सुबह गाँव लौटकर उन्होंने यह घटना सबको बताई। गाँव के बुजुर्गों ने बताया कि यह श्राप तभी मिट सकता है जब उस निर्दोष औरत की आत्मा को शांति मिले।

श्राप का अंत

गाँव वालों ने मिलकर पूजा की, और उस औरत की आत्मा की शांति के लिए हवन करवाया। इसके बाद जंगल से अजीब घटनाएँ बंद हो गईं।

पर कहते हैं, कभी-कभी रात के अंधेरे में हवेली से अभी भी कोई फुसफुसाता हुआ सुनाई देता है…

Image generated by meta.ai

Leave a Comment