“छोटा चंपक, बड़ा सपना” : एक प्रेरणादायक और भावनात्मक कहानी

The Motivational Story : गाँव का होशियार लड़का

चंपक नाम का एक 11 वर्षीय लड़का, नवलपुर गाँव में अपनी दादी के साथ रहता था। उसके माता-पिता शहर में मजदूरी करते थे और साल में सिर्फ एक बार आते थे। चंपक बहुत होशियार और मेहनती था। वह न सिर्फ स्कूल में अव्वल आता था, बल्कि खेतों और घर के कामों में भी दादी का हाथ बँटाता।

चंपक का सपना था – “गाँव का पहला इंजीनियर” बनना।

पर उसकी राह आसान नहीं थी। स्कूल में किताबें कम थीं, मास्टर जी महीनों गायब रहते, और बिजली भी रोज नहीं आती थी। लेकिन चंपक हार नहीं मानता था। वह पुराने अख़बारों से अक्षर पहचानता, मिट्टी की पट्टी पर गणित के सवाल हल करता और टेबल के नीचे दिया जलाकर पढ़ाई करता।

The Motivational Story : एक सच्ची परीक्षा

एक दिन गाँव में एक ब्लॉक स्तर की प्रतियोगिता हुई – “ग्राम प्रतिभा खोज परीक्षा।” यह परीक्षा राज्य स्तर पर हो रही थी और जो बच्चा जीतता, उसे फ्री में उच्च शिक्षा के लिए सरकारी स्कॉलरशिप दी जाती।

चंपक ने भी आवेदन कर दिया।

परीक्षा के दिन जब वह ब्लॉक मुख्यालय पहुंचा, तो उसे देखकर दूसरे बच्चों ने उसका मज़ाक उड़ाया –
“अरे देखो, गाँव वाला लड़का बिना जूते के आया है!”
“इसको तो पेन पकड़ना भी नहीं आता होगा।”

चंपक चुप रहा, लेकिन उसका आत्मविश्वास नहीं टूटा। उसने पूरे मन से परीक्षा दी



The Motivational Story : मेहनत का फल

कुछ हफ्तों बाद, परिणाम आया।
गाँव भर में ढोल बजा –
“चंपक ने जिला टॉप किया!”

अखबारों में उसका नाम छपा। गाँव के लोग, जो कभी उसके ख्वाबों को मज़ाक समझते थे, अब गर्व से उसका नाम लेते थे। सरकार की तरफ से उसे शहर के अच्छे स्कूल में दाखिला मिला, किताबें मिलीं, और रहने का इंतज़ाम भी।

जब चंपक शहर गया, तो उसकी आँखों में आँसू थे –
“दादी, मैं एक दिन इंजीनियर बनकर आपको फिर से हँसते देखना चाहता हूँ।”

The Motivational Story : बड़ा सपना, बड़ा बदलाव

समय बीतता गया। चंपक ने हाई स्कूल में भी टॉप किया, फिर इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया। चार साल बाद वह एक बड़ी कंपनी में नौकरी करने लगा।

लेकिन उसने गाँव को नहीं भूला। पहली तनख्वाह से वह गाँव लौटा – हाथ में एक लैपटॉप और कुछ किताबें लेकर।

उसने गाँव में एक “शिक्षा केंद्र” खोला, जहाँ बच्चे आकर पढ़ाई करते, कंप्यूटर सीखते और सपने देखना शुरू करते।

चंपक अब सिर्फ चंपक नहीं था। वह “चंपक भैया” बन चुका था – एक उम्मीद, एक प्रेरणा।



सीख

👉 सपने चाहे छोटे गाँव से निकलें या छोटे घर से – अगर मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं।
👉 असली हीरो वो होता है जो सिर्फ खुद नहीं बदलता, बल्कि औरों को भी बदलने की ताकत देता है।


Leave a Comment