“पंख सपनों के” : एक किसान पुत्र की प्रेरणादायक यात्रा

किसान पुत्र की सफलता : मिट्टी से सोना

राजस्थान के एक छोटे से गाँव ढाणीसर में एक साधारण किसान रामप्रसाद अपने परिवार के साथ रहता था। उसका बड़ा बेटा अर्जुन एक होशियार लेकिन गरीब लड़का था। खेतों में काम करते हुए भी उसकी आँखों में हमेशा कुछ बड़ा करने का सपना पलता था। अर्जुन पढ़ाई में तेज़ था, लेकिन गाँव में सिर्फ पांचवीं तक ही स्कूल था।

हर सुबह अर्जुन खेतों में हल चलाने से पहले किताब लेकर बैठता और पढ़ता। उसके पिता को उस पर बहुत गर्व था, लेकिन उन्हें यह भी डर था कि गरीबी उनके बेटे के सपनों को तोड़ न दे।

एक दिन अर्जुन ने अपने पिताजी से कहा,
“पिताजी, मैं IAS बनना चाहता हूँ।”
रामप्रसाद कुछ पल चुप रहे, फिर बोले,
“बेटा, सपना बड़ा है, पर अगर मेहनत दिल से करे, तो भगवान भी साथ देता है।”



किसान पुत्र की सफलता : गाँव से शहर तक

अर्जुन की पढ़ाई दसवीं के बाद रुकने वाली थी, लेकिन गाँव के मास्टरजी ने उसके पिता को समझाया, “रामप्रसाद, ये लड़का गाँव का नाम रोशन कर सकता है। इसे शहर भेज दो।”

कर्ज लेकर, कुछ गहने बेचकर और कुछ जमीन गिरवी रखकर रामप्रसाद ने अर्जुन को जयपुर भेजा। वहां अर्जुन ने सरकारी हॉस्टल में रहकर बारहवीं पूरी की और फिर ग्रेजुएशन भी किया। लेकिन आर्थिक तंगी अब भी उसके साथ थी।

अर्जुन अब UPSC की तैयारी करने लगा था। दिन में कॉलेज और रात को मजदूरी करता था – कभी अखबार बाँटता, कभी चाय की दुकान पर काम करता। लेकिन उसका सपना अडिग था।



किसान पुत्र की सफलता : संघर्ष की आँधी

UPSC की तैयारी आसान नहीं थी। लाखों छात्र, सीमित सीटें। अर्जुन ने पहली बार में परीक्षा दी, लेकिन असफल हुआ। गाँव से फोन आया, “बेटा, कोई बात नहीं, फिर से कोशिश कर। हम तेरे साथ हैं।”

दूसरी बार भी उसका इंटरव्यू छूट गया। अब अर्जुन टूटने लगा था। कई रातें वह छत पर बैठा आसमान ताकता और सोचता, “क्या मैं वाकई काबिल हूँ?”

तभी उसके दोस्त राहुल ने कहा,
“अर्जुन, तुम सिर्फ अपने लिए नहीं, उन लाखों बच्चों के लिए संघर्ष कर रहे हो जो गरीबी के कारण सपने देखना छोड़ देते हैं। तुम उनका सपना बनो।”

ये शब्द उसके दिल में घर कर गए।



किसान पुत्र की सफलता : उम्मीद की किरण

तीसरी बार अर्जुन ने पूरी तैयारी के साथ परीक्षा दी। उसने सोशल मीडिया छोड़ दिया, मोबाइल बंद कर दिया और हर दिन 12-14 घंटे पढ़ाई की। अब वो सिर्फ किताबें नहीं, खुद को पढ़ रहा था – अपनी कमजोरी, अपनी ताकत।

इस बार प्री, मेन्स और इंटरव्यू – तीनों में अर्जुन ने शानदार प्रदर्शन किया।

जब रिजल्ट आया, तो उसने अपनी आँखों से उस लिस्ट में अपना नाम देखा –
“अर्जुन रामप्रसाद – All India Rank 9”

उस पल उसकी आँखों से आंसू बहने लगे। उसने सबसे पहले अपने गाँव फोन किया,
“पिताजी, मैं अब अफसर बन गया हूँ।”

गाँव में खुशी का माहौल था। लोग मिठाई बाँट रहे थे, ढोल बज रहे थे। वह छोटा किसान पुत्र अब सबके लिए मिसाल बन चुका था।



किसान पुत्र की सफलता : वापसी और बदलाव

अर्जुन ने ट्रेनिंग के बाद पहली पोस्टिंग में ही सबसे पहले अपने गाँव ढाणीसर में स्कूल और पुस्तकालय खुलवाया। अब बच्चों को पढ़ाई के लिए शहर नहीं जाना पड़ता था।

उसने एक फाउंडेशन भी शुरू किया – “सपनों को पंख”, जिसमें वो गरीब छात्रों की UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मदद करता था।

जब एक रिपोर्टर ने पूछा, “सर, आपकी सबसे बड़ी प्रेरणा क्या थी?”

अर्जुन ने मुस्कुरा कर कहा,
“मेरे पिता का मिट्टी से सना हाथ और वो एक वाक्य – ‘सपना बड़ा है, पर मेहनत दिल से करे, तो भगवान भी साथ देता है।'”



किसान पुत्र की सफलता : सीख

संघर्ष जीवन का हिस्सा है, लेकिन हार मानना विकल्प नहीं।

सपने बड़े हों या छोटे, अगर उनका पीछा पूरे जुनून और निष्ठा से किया जाए, तो वो ज़रूर पूरे होते हैं।

शिक्षा ही एकमात्र रास्ता है जिससे समाज, व्यक्ति और देश में बदलाव लाया जा सकता है।


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