रिया एक शांत-सी लड़की थी। उसे हर बात अपनी डायरी में लिखने की आदत थी। कॉलेज खत्म होने के बाद वह एक नए शहर में शिफ्ट हुई। शहर के कोने पर एक पुराना सा मकान था—सस्ता भी और बिल्कुल शांत। मकान मालिक ने बस एक बात कही थी:
“बस एक कमरा बंद रखिए… बाकी घर आपका।”
रिया ने हँसकर बात टाल दी। उसे लगा शायद कमरा पुराना होगा या सामान भरा होगा।
पहली रात सब ठीक रहा, लेकिन दूसरी रात से अजीब-सी आवाज़ें आने लगीं—खुरचने की, धीमी थाप जैसी… जैसे कोई दीवार के अंदर चल रहा हो। जब भी रिया डरकर चादर ओढ़ लेती, आवाज़ें अचानक बंद हो जातीं।
एक रात बिजली चली गई। पूरा घर अँधेरे में डूब गया। तभी बंद कमरे के अंदर से एक धीमी आवाज़ आई—
“रिया… डायरी मत बंद करो…”
अपना नाम सुनकर उसका दिल तेज़ धड़कने लगा। वह काँपते हाथों से उस कमरे के पास पहुँची। दरवाज़ा खोलना मना था… लेकिन आवाज़ लगातार बढ़ रही थी। उसने चाबी लगाई और दरवाज़ा खोल दिया।
कमरा बिल्कुल खाली था।
बस एक पुरानी डायरी पड़ी थी। डायरी पर रिया का नाम लिखा था, लेकिन वह उसकी लिखावट नहीं थी। उसने डायरी खोली। पहले ही पन्ने पर लिखा था—
“आज एक नई लड़की इस घर में आई है। उसका नाम रिया है। वह भी मेरी तरह डायरी लिखती है… पर उसे अभी नहीं पता कि यहाँ सिर्फ दीवारें नहीं, हम भी बोलते हैं।”
तभी दीवार पर उंगलियों के निशान खुद-ब-खुद बनने लगे और एक लाइन लिखी हुई दिखाई दी—
“तुम भी यहीं रह जाओगी… हमारे साथ।”
रिया ने भागने के लिए दरवाज़ा खोला—लेकिन बाहर लंबी अँधेरी गैलरी थी। दोनों तरफ दरवाज़े… और हर दरवाज़े पर एक नाम लिखा था। एक दरवाज़े पर लिखा था—
“रिया – Completed”
उसे समझ आ गया कि यह घर लोगों को नहीं, कहानियों को अपने पास रखता है… और अब उसकी कहानी भी यहीं बंद हो चुकी है।
सुबह मकान मालिक आया और मुस्कुराकर बोला—
“एक और रियल स्टोरी तैयार हो गई…”
और बंद कमरे का दरवाज़ा फिर से ताला लग गया।
— The Real Story