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“नीलकंठ की दोस्ती”

जंगल का छोटा सा गाँव

बहुत समय पहले की बात है। एक घना जंगल था, जिसके बीचोंबीच एक छोटा सा गाँव बसा हुआ था – हरियापुर। इस गाँव में बच्चे, बूढ़े, जानवर और पक्षी सब मिल-जुल कर रहते थे। यहाँ एक नन्हा सा मोर रहता था – उसका नाम था नीलकंठ। वह बहुत ही प्यारा, रंग-बिरंगा और चंचल था। लेकिन उसका एक दुःख था – उसके कोई दोस्त नहीं थे।

नीलकंठ हर रोज़ तालाब के पास नाचता, गाता, अपने पंख फैलाकर इठलाता, लेकिन कोई भी जानवर उसके साथ खेलने नहीं आता। खरगोश खेलते थे, बंदर झूला झूलते थे, हिरण दोड़ते थे, पर नीलकंठ अकेला रह जाता।


दोस्ती की तलाश

एक दिन नीलकंठ अपनी मम्मी से बोला, “मुझे भी दोस्त चाहिए मम्मा। सबके दोस्त हैं, मेरे क्यों नहीं?” मम्मा मुस्कुरा कर बोलीं, “तुम्हें दोस्त चाहिए, तो पहले दोस्त बनो बेटा। जाकर सबसे मिलो, बात करो, और उनकी मदद करो।”

नीलकंठ ने मम्मा की बात गांठ बांध ली। अगले ही दिन वह सबसे पहले खरगोशों के पास गया और बोला, “मैं तुम्हारे लिए कुछ घास लाया हूँ। चलो, आज हम साथ खेलें।” खरगोश मुस्कराए और बोले, “ठीक है नीलकंठ, आज से तुम भी हमारे दोस्त हो।”

फिर वह बंदरों के पास गया, उनके लिए केले लाया। धीरे-धीरे वह सबका प्यारा बन गया।


जंगल में मुसीबत

एक दिन जंगल में अजीब शोर मचा। गाँव के पास एक शिकारी आ गया था। वह जानवरों को पकड़ने के लिए जाल बिछा रहा था। सभी जानवर डर गए।

नीलकंठ ने साहस दिखाया। वह उड़ कर ऊँचाई से देखता रहा, और जहां भी जाल दिखा, वहाँ जाकर आवाज़ लगाता – “सावधान! जाल है!” उसने कई जानवरों को जाल में फँसने से बचा लिया।

बंदर, खरगोश, हिरण सब उसकी बहादुरी से बहुत खुश हुए। उन्होंने उसे ‘जंगल का दोस्त’ नाम दिया।

सच्ची दोस्ती की जीत

अब नीलकंठ के बहुत सारे दोस्त बन गए थे। वे सब रोज़ साथ खेलते, खाते, और एक-दूसरे की मदद करते। गाँव के बच्चे भी नीलकंठ के दोस्त बन गए। वह स्कूल के पास आकर बच्चों को अपने नाच से खुश करता।

एक दिन बारिश बहुत ज़्यादा हुई। तालाब का पानी गाँव में घुस गया। जानवर और बच्चे सब परेशान हो गए। नीलकंठ ने फिर एक बार हिम्मत दिखाई। वह गाँव के मुखिया के पास उड़कर गया और उसे बताया कि स्कूल के पास पानी भर रहा है। मुखिया ने तुरंत गाँववालों को बुलाया और सबने मिलकर बाँध बना दिया।

गाँव बच गया – सब ने मिलकर नीलकंठ को धन्यवाद कहा। अब नीलकंठ सिर्फ एक मोर नहीं था, वह सबका सच्चा और बहादुर दोस्त बन चुका था।


Moral Of The Story

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि अगर हम सच्चे दिल से दूसरों की मदद करें, उनके साथ प्यार से पेश आएँ, तो दोस्ती अपने आप मिल जाती है। और एक अच्छा दोस्त वही होता है जो मुश्किल समय में साथ दे।

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