एक नया दोस्त
छोटे से गाँव “हरियापुर” में एक नन्हा सा लड़का रहता था — अर्जुन। वो बहुत जिज्ञासु था, हमेशा नई-नई बातें जानने की कोशिश करता। लेकिन गाँव के स्कूल में पढ़ाई उसे थोड़ी उबाऊ लगती थी। एक दिन, जंगल की ओर टहलते हुए अर्जुन की मुलाकात एक बोलने वाले तोते मीठू से हुई।
मीठू ने अर्जुन से पूछा, “तुम कुछ नया सीखना चाहते हो?”
अर्जुन चौंका, “तुम बोल कैसे रहे हो?”
तोता हँस पड़ा, “मैं रहस्यमयी स्कूल से पढ़ा हूँ!”
अर्जुन ने उत्साह से पूछा, “क्या मैं भी वहाँ जा सकता हूँ?”
तोता बोला, “अगर तुम में हिम्मत है, तो चलो मेरे साथ।”
रहस्यमयी स्कूल का प्रवेश
मीठू अर्जुन को जंगल के गहरे हिस्से में एक बहुत बड़े बरगद के पेड़ के पास लाया। वहां एक सुनहरी रोशनी चमक रही थी। अचानक पेड़ की जड़ें हटीं और एक सीढ़ी नीचे उतरती दिखी। अर्जुन थोड़ा डर गया लेकिन उत्सुकता ज़्यादा थी।
वो सीढ़ियों से नीचे गया और एक विशालकाय गुफा में पहुँचा। वहाँ तरह-तरह के जानवर पढ़ाई कर रहे थे — एक हाथी पेंटिंग कर रहा था, एक खरगोश गणित सीख रहा था, और एक उल्लू बच्चों को विज्ञान पढ़ा रहा था।
“ये है हमारा जंगल स्कूल,” मीठू बोला, “यहाँ हर कोई कुछ नया सीखता है — प्यार, दोस्ती, विज्ञान, कला और जीवन की सच्ची शिक्षा।”
अर्जुन की सीख
अर्जुन ने वहां बहुत कुछ सीखा। सबसे पहले उसने दोस्ती की अहमियत जानी। एक दिन एक भालू ने गुस्से में अपने दोस्त को धक्का दे दिया। अर्जुन ने समझाया, “सच्चा दोस्त वही है जो माफ करना जानता है।”
दूसरे दिन विज्ञान की कक्षा में उल्लू सर ने उसे बताया कि पेड़ ऑक्सीजन देते हैं, इसलिए पेड़ों की रक्षा ज़रूरी है।
फिर कला की कक्षा में उसने सीखा कि हर इंसान में कोई न कोई हुनर होता है। अर्जुन ने वहाँ पहली बार पेंटिंग बनाई — एक नीला आसमान, उड़ते पंछी, और एक सुनहरा सूरज।
अंतिम परीक्षा
एक दिन स्कूल में अंतिम परीक्षा हुई — “क्या तुमने सच्चे दिल से सीखा है?”
सवाल था:
- अगर कोई तुमसे बुरा बोले तो क्या करोगे?
- अगर कोई मदद माँगे तो क्या करोगे?
- अगर तुम्हें कोई चीज़ फेंकने का मन करे तो क्या करोगे?
अर्जुन ने जवाब दिया:
- “मैं चुप रहूँगा और उसे समझाने की कोशिश करूँगा।”
- “मदद करूँगा, जैसे मेरे साथ की गई।”
- “मैं चीज़ को रीसायकल करूँगा।”
उल्लू सर मुस्कराए, “अर्जुन, तुम पास हो गए हो।”
गाँव में बदलाव
जब अर्जुन वापस गाँव आया, वह बिल्कुल बदल गया था। वह बच्चों को पेड़ लगाना सिखाने लगा, बड़ों की मदद करने लगा और गाँव में एक छोटा पुस्तकालय भी बनवाया।
सब हैरान थे — “ये अर्जुन में ये बदलाव कैसे आया?”
अर्जुन बस मुस्कराता और कहता, “मैंने जंगल के रहस्यमयी स्कूल से सीखा है।”
सीख
सच्ची शिक्षा केवल किताबों से नहीं, जीवन के अनुभवों से मिलती है। दया, मित्रता, और प्रकृति की रक्षा सबसे बड़ी सीख है। हर बच्चे में एक खास बात होती है, ज़रूरत है उसे समझने और बढ़ावा देने की।