बहुत समय पहले, पहाड़ों के पार, एक सुंदर सा गाँव था — इंद्रधनुष गाँव। वहाँ के घर रंग-बिरंगे थे, जैसे किसी ने सात रंगों से उन्हें सजाया हो। गाँव के बच्चे हर दिन नए-नए खेल खेलते, पेड़ों पर झूला झूलते और हँसी-ठिठोली करते।
इस गाँव में एक छोटा सा लड़का रहता था, जिसका नाम था चिंटू। चिंटू बहुत ही जिज्ञासु और साहसी था। उसे नई चीज़ें खोजने का बहुत शौक था। उसके सबसे अच्छे दोस्त थे — मीना, जो बहुत बुद्धिमान थी, और बबलू, जो हमेशा हँसता रहता था।
एक रहस्यमय बुलावा
एक दिन, गाँव के चौक में अचानक एक चमचमाता हुआ लिफाफा गिरा। सब बच्चे दौड़कर वहाँ पहुँचे। चिंटू ने लिफाफा उठाया। उस पर सुनहरी स्याही से लिखा था —
“सपनों की वादी में आने का निमंत्रण! साहसी बच्चों के लिए विशेष यात्रा!”
सब बच्चे हैरान थे। क्या सच में ऐसा कोई जादुई स्थान होता है? मीना ने कहा, “हमें चलना चाहिए! कौन जानता है, क्या अद्भुत चीजें देखने को मिलें!”
चिंटू, मीना और बबलू ने अपने छोटे-छोटे बैग पैक किए — कुछ खाने का सामान, एक नक्शा और बहुत सारा उत्साह!
सफर की शुरुआत
अगली सुबह, सूरज की पहली किरण के साथ वे तीनों निकल पड़े। रास्ते में उन्हें एक बूढ़े साधु मिले, जो एक चमचमाती छड़ी लिए बैठे थे। साधु ने मुस्कुराते हुए कहा, “बच्चो, सफर लंबा और चुनौतीपूर्ण होगा। लेकिन अगर दिल से सच्चे रहोगे, तो सपनों की वादी तुम्हारा इंतज़ार कर रही है।”
उन्होंने बच्चों को तीन चीज़ें दीं —
- एक जादुई घंटी, जो खतरे से बचाएगी,
- एक फूल, जो अंधेरे में रोशनी करेगा,
- और एक छोटी सी किताब, जिसमें रहस्य सुलझाने के उपाय थे।
चिंटू ने धन्यवाद कहा और सबने फिर से सफर शुरू किया।
पहला पड़ाव: मुस्कुराते पेड़ों का जंगल
चलते-चलते वे एक घने जंगल में पहुँचे। वहाँ के पेड़ कुछ अलग ही थे — सबके चेहरे थे, और वे हँसते थे! एक पेड़ बोला, “अगर हमारे सवालों के सही जवाब दोगे, तो हम रास्ता खोलेंगे।”
पेड़ों ने तीन पहेलियाँ पूछीं:
“ऐसी कौन सी चीज़ है, जो बढ़ती जाती है लेकिन कभी पीछे नहीं जाती?”
मीना ने तुरंत जवाब दिया, “समय!”
“ऐसा कौन है, जिसका सिर है पर टोपी नहीं पहनता?”
चिंटू ने सोचा और बोला, “पर्वत!”
“ऐसी कौन सी नदी है जो जमीन पर नहीं बहती?”
बबलू ने खिलखिलाते हुए कहा, “दूध की नदी सपनों में!”
पेड़ जोर-जोर से हँसे और रास्ता खुल गया।
दूसरा पड़ाव: हँसते-गाते बादलों का देश
जंगल पार करने के बाद वे एक पहाड़ी पर चढ़े, जहाँ बादल ज़मीन पर उतर आए थे! बादल गा रहे थे, नाच रहे थे। एक बादल बोला, “अगर हमारे साथ नाचोगे और हमें हँसाओगे, तो हम तुम्हें आगे ले चलेंगे।”
बबलू ने अपने अजीब से डांस मूव्स दिखाए, मीना ने चुटकुले सुनाए और चिंटू ने मज़ेदार आवाज़ों की नकल की। बादल इतने हँसे कि आकाश में इंद्रधनुष बन गया और एक पुल तैयार हो गया, जिस पर चलकर बच्चे आगे बढ़े।
तीसरा पड़ाव: सन्नाटे की घाटी
अब वे एक ऐसी जगह पहुँचे जहाँ सब कुछ चुप था। ना हवा, ना पत्तों की सरसराहट — बस एक गहरा सन्नाटा।
मीना ने किताब खोली। किताब में लिखा था:
“सन्नाटा डराता है, लेकिन गाना रास्ता दिखाता है।”
तीनों ने मिलकर अपना प्रिय गीत गाना शुरू किया। धीरे-धीरे घाटी में गूंज भर गई और अचानक एक गुप्त दरवाज़ा खुला।
सपनों की वादी
दरवाज़ा पार करते ही वे पहुँच गए — सपनों की वादी में!
वहाँ सब कुछ जादुई था — चॉकलेट के पेड़, रसगुल्ले जैसे बादल, किताबों से भरे झरने, और गिलहरियों के खेल के मैदान! बच्चे आँखें फाड़कर सब देख रहे थे।
वहाँ एक सुंदर परी आई — इन्द्रा परी। उसने बच्चों से कहा, “तुमने साहस, चतुराई और दिल से दोस्ती निभाई। इस वादी का रहस्य यही है — जो सच्चे दिल से सपने देखता है और मेहनत करता है, उसे यह वादी मिलती है।”
परी ने उन्हें एक एक चमकता हुआ तोहफा दिया:
चिंटू को एक अनंत साहस का बटन,
मीना को ज्ञान का चमकता फूल,
बबलू को हँसी का झरना।
घर वापसी
बच्चे बहुत खुश थे। लेकिन उन्हें अपने गाँव लौटना भी था। परी ने उन्हें एक जादुई पतंग दी, जिससे वे उड़ते-उड़ते वापस इंद्रधनुष गाँव आ गए।
गाँव के सब लोग उन्हें देखकर खुश हो गए। बच्चों ने अपनी यात्रा के किस्से सुनाए और सबको सिखाया —
“सपने देखो, सच्चे दिल से मेहनत करो, और हमेशा मुस्कुराते रहो!”
इंद्रधनुष गाँव और भी रंगीन हो गया — क्योंकि अब हर बच्चे के दिल में सपनों की वादी बस गई थी।
Moral Of The Story
“इंद्रधनुष गाँव की जादुई यात्रा” हमें सिखाती है कि सपनों को सच करने के लिए साहस, दोस्ती और सच्चाई का साथ जरूरी है। चिंटू, मीना और बबलू ने हर मुश्किल का सामना मिल-जुलकर किया, बिना डर के आगे बढ़ते रहे। कहानी यह बताती है कि चाहे रास्ते में कितनी भी कठिनाइयाँ आएं — मुस्कुराते पेड़ों की पहेलियाँ हों या सन्नाटे की घाटी का डर — यदि हम धैर्य और चतुराई से काम लें, तो हर चुनौती आसान बन जाती है।
सपनों की वादी एक प्रतीक है उन खुशियों और सफलताओं का, जो मेहनत और ईमानदारी से मिलने वाली होती हैं। साथ ही, यह कहानी बच्चों को यह भी सिखाती है कि जीवन में हँसी, सहयोग और सकारात्मक सोच कितनी जरूरी है।
हर बच्चा, जो सच्चे दिल से प्रयास करता है, एक दिन अपने सपनों की उड़ान ज़रूर भरता है — ठीक वैसे ही जैसे चिंटू, मीना और बबलू ने जादुई पतंग पर उड़कर इंद्रधनुष गाँव लौटकर सबको प्रेरित किया।
अंततः, यह कहानी हमें बताती है —
“डर को हराओ, सपनों पर विश्वास करो, और मुस्कान के साथ आगे बढ़ो!”
"हर बच्चे के दिल में एक जादुई वादी है… बस विश्वास की जरूरत है!"