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छोटा दीपक और आसमान का पुल

एक खास सपना
छोटा दीपक एक गरीब लेकिन समझदार और निडर बालक था। वह अपनी माँ के साथ एक पहाड़ी गाँव में रहता था। दीपक को सितारे बहुत पसंद थे। हर रात वह छत पर लेटकर तारों से बातें करता और उन्हें अपना दर्द, अपनी चाहतें बताता। एक रात उसने तारे से पूछा, “क्या मैं कभी आसमान तक पहुँच पाऊँगा?” तारे ने मुस्कराकर कहा, “अगर दिल सच्चा हो, तो रास्ता खुद बन जाता है।”

अगली सुबह दीपक ने एक सपना देखा – एक पुल था जो धरती से आसमान तक जाता था। उस पर चढ़कर बच्चे स्वर्ग जैसी दुनिया में जा रहे थे – जहाँ हर बच्चा पढ़ता था, हँसता था और कोई भूखा नहीं रहता था। दीपक की आँखें चमक उठीं। उसने निश्चय किया – “मैं भी ऐसा पुल बनाऊँगा।”


गाँव की सच्चाई
दीपक के गाँव में बहुत से बच्चे स्कूल नहीं जाते थे। कुछ के पास किताबें नहीं थीं, कुछ के माँ-बाप उन्हें खेतों में काम करने भेजते थे। दीपक ने अपनी माँ से कहा, “मैं बच्चों के लिए स्कूल खोलूँगा।” माँ ने मुस्कराकर उसका सिर चूमा, “मेरे लाल, अगर तू चाहे तो तारे भी ज़मीन पर उतर आएँगे।”

दीपक ने पुरानी किताबें इकट्ठी कीं, टूटी चारपाइयाँ जोड़कर बेंच बनाई, और गाँव के एक पुराने मंदिर में क्लास शुरू कर दी। शुरू में कोई बच्चा नहीं आया। लेकिन वह हार नहीं माना। हर सुबह वह गाँव-गाँव जाकर बच्चों को बुलाता, कहानियाँ सुनाता, और गुब्बारे देकर उन्हें लुभाता।

धीरे-धीरे बच्चे आने लगे।


संघर्ष और चमत्कार
गाँव के कुछ लोग दीपक का मज़ाक उड़ाते, कहते – “छोटा बच्चा क्या स्कूल चलाएगा?” लेकिन दीपक डटा रहा। एक दिन गाँव में एक अधिकारी आया – वह सरकार से था और ग्रामीण शिक्षा परियोजना देख रहा था। उसने दीपक को बच्चों को पढ़ाते देखा। उसे विश्वास नहीं हुआ कि एक बच्चा इतना बड़ा काम कर रहा है।

अधिकारी ने उसकी कहानी अखबार में छपवाई। अगले महीने शहर से कई लोग आए – किताबें, खिलौने और मदद लेकर। गाँव में असली स्कूल बन गया। लेकिन दीपक ने कहा – “मैं पढ़ाने का तरीका नहीं बदलूँगा – मेरी पहली कक्षा हमेशा कहानियों से शुरू होगी।”


आसमान का पुल
अब दीपक बड़ा हो चुका था। वह गाँव के स्कूल का प्रधान शिक्षक बन गया था। लेकिन उसका सपना वही था – बच्चों को ऊपर उठाना, आसमान तक ले जाना।

एक रात, जब दीपक अब वृद्ध हो चुका था, एक छोटा बच्चा उसके पास आया और बोला, “गुरुजी, क्या आप सच में आसमान तक जा चुके हो?” दीपक ने मुस्कराकर कहा, “मैं नहीं… लेकिन हर वह बच्चा जो सीखता है, वह एक सीढ़ी चढ़ जाता है। और जब सभी सीढ़ियाँ चढ़ ले, तो आसमान अपने आप पास आ जाता है।”

बच्चे ने पूछा, “तो क्या स्कूल ही वह पुल है?”
दीपक ने कहा, “हाँ, यह स्कूल नहीं… यह आसमान का पुल है।”



Moral Of The Story


शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जो किसी भी बच्चे को ऊँचाइयों तक ले जा सकता है। अगर इरादे नेक हों तो उम्र, साधन या हालात आड़े नहीं आते। सपनों को सच करने के लिए पहला कदम खुद उठाना पड़ता है।

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