एक छोटा बीज
बहुत समय पहले की बात है, एक घना जंगल था। उसमें तरह-तरह के पेड़, पौधे, और जानवर रहते थे। उसी जंगल के एक कोने में, एक छोटा सा बीज ज़मीन में गिरा था। वह बीज एक आम का था, जो एक पके आम के गिरने से वहां पड़ा था।
छोटा बीज बहुत उत्साहित था। उसने ऊपर आसमान की ओर देखा और सोचा, “एक दिन मैं भी बड़ा पेड़ बनूंगा, जिस पर हज़ारों आम लगेंगे। बच्चे मेरी छांव में खेलेंगे, पक्षी मेरी शाखों पर गाना गाएंगे।”
लेकिन तभी एक चींटी हँसते हुए बोली, “तू? तू तो बस एक बीज है! इतना छोटा सा कि एक तिनके से दब जाए। तुझमें क्या ताक़त?”
बीज को थोड़ी ठेस पहुँची, लेकिन उसने हार नहीं मानी। उसने खुद से कहा, “हर बड़ा पेड़ एक बीज से ही शुरू होता है। मुझे सिर्फ धैर्य रखना होगा।”
पहली बारिश
कुछ दिनों बाद, पहली बारिश हुई। ठंडी बूँदें बीज पर गिरीं और उसे मिट्टी में और अंदर धकेल दिया। बीज घबरा गया – सब अंधेरा हो गया। पर अंदर कहीं से आवाज़ आई, “यही तो शुरुआत है। अंधेरे में ही तो बीज अंकुर बनता है।”
बीज ने धीरे-धीरे अपनी ताकत इकट्ठा की और ज़मीन के अंदर से अंकुर बनकर ऊपर की ओर बढ़ने लगा। कई दिन लगे, लेकिन आखिरकार एक छोटी सी हरी कोपल मिट्टी से बाहर निकली।
सूरज की पहली किरण उस कोपल पर पड़ी, और वो खिल उठी।
संघर्ष की शुरुआत
अब अंकुर एक छोटा पौधा बन गया था। लेकिन उसका सफर आसान नहीं था। कभी कोई बकरी आकर उसकी पत्तियाँ चबा जाती, तो कभी तेज़ हवाएँ उसे झुका देतीं। बारिश कभी ज्यादा होती, तो कभी महीनों नहीं।
एक दिन तेज़ धूप में वह सूखने लगा। उसने आस-पास के बड़े पेड़ों से मदद माँगी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी।
एक बूढ़ा पीपल का पेड़ धीरे से बोला, “संघर्ष ही जीवन है, बेटा। जो इसे पार कर जाता है, वही छांव देता है। धैर्य रखो। अपने भीतर की जड़ों को मज़बूत करो।”
उस पौधे ने उस दिन से शिकायत करना छोड़ दिया और हर मौसम को स्वीकार करना सीख लिया।
मेहनत का फल
वर्षों बीत गए। वह छोटा पौधा अब एक मंझला पेड़ बन चुका था। उसकी शाखाएँ आसमान की ओर बढ़ रही थीं। अब उसकी छांव में खरगोश खेलते, तोते चहचहाते और बच्चे दोपहर में उसके नीचे खेलते।
लेकिन आम नहीं लगे थे अभी तक।
पेड़ उदास था। “क्या मैं कभी फल नहीं दूंगा?” उसने सोचा।
एक तोता बोला, “हर चीज़ का समय होता है। तू निराश मत हो। तूने संघर्ष किया है, मेहनत की है – उसका फल ज़रूर मिलेगा।”
और फिर एक दिन बसंत आया।
हवा में मिठास थी। चारों ओर फूल खिले थे। उस पेड़ पर भी पहली बार फूल आए। धीरे-धीरे वे फूल आम में बदल गए – रसदार, सुनहरे आम।
पेड़ की खुशी का ठिकाना नहीं था। बच्चे दौड़कर आम तोड़ने आए, जानवरों ने भी खाया और उसकी छांव में कई कहानियाँ गूंजने लगीं।
सबसे ऊँचा सपना
अब वह आम का पेड़ जंगल के सबसे सुंदर और ऊँचे पेड़ों में गिना जाने लगा। वही चींटी, जिसने कभी उसका मज़ाक उड़ाया था, अब उसकी छाल पर घर बनाकर रह रही थी।
“मुझे माफ़ कर दो,” चींटी बोली।
पेड़ मुस्कराया और बोला, “तुम्हारे तानों ने मुझे मज़बूत बनाया। मैंने सीखा कि आलोचना भी प्रेरणा बन सकती है।”
तभी एक नन्हा बीज उसी पेड़ से गिरा।
पेड़ ने उसे देखा और धीरे से कहा, “तू भी बड़ा बनेगा, अगर सपना देखे और मेहनत करे।”
उस दिन से, जंगल में हर बीज को यही प्रेरणा दी जाती — “हर बीज में एक सपना छिपा होता है, बस ज़रूरत होती है विश्वास और धैर्य की।”
Moral Of The Story
यह कहानी हमें सिखाती है कि कोई भी छोटा काम या अस्तित्व व्यर्थ नहीं होता। हर संघर्ष, हर असफलता, एक दिन सफलता की ओर ले जाती है। हमें धैर्य, मेहनत और आत्म-विश्वास से अपने सपनों की ओर बढ़ना चाहिए।