The Best Love Story : पहली मुलाकात
दिल्ली की एक सर्द सुबह थी। जनवरी का महीना था और कोहरे की चादर ने पूरे शहर को अपने आगोश में ले रखा था। अंधेरी गलियों से निकलती हल्की धूप किसी खोए हुए सपने जैसी लग रही थी। रजनीगंधा की खुशबू लिए वो सुबह एक नई शुरुआत का संकेत दे रही थी।
मेघा, 27 साल की एक स्वतंत्र और आत्मनिर्भर लड़की, रोज़ की तरह ऑफिस जाने के लिए मेट्रो पकड़ने निकली। उसके कानों में इयरफोन था, पर आंखें थकी हुई सी। वो हाल ही में एक टूटे रिश्ते से उभरी थी और अब किसी भी नये रिश्ते के लिए खुद को तैयार नहीं मानती थी।
उसी मेट्रो स्टेशन पर, एक और शख़्स खड़ा था — आरव। 30 साल का एक लेखक, जो अपने उपन्यास की कहानी बुनते-बुनते रोज़ लोगों की भीड़ में अपने किरदार तलाश करता था। वो अक्सर दूसरों को देख कर कहानियाँ गढ़ता, पर खुद के लिए कहानी लिखना जैसे भूल गया था।
जब मेघा और आरव पहली बार आमने-सामने आए, तो दोनों ने एक-दूसरे को देखा तक नहीं। आरव सीट पर बैठा किताब पढ़ रहा था, और मेघा सामने खड़ी थी, खिड़की से बाहर झांकते हुए। पर अगले कुछ हफ्तों में दोनों रोज़ उसी समय, उसी कोच में मिलने लगे।
The Best Love Story : बातचीत की शुरुआत
एक दिन मेघा का पर्स गिरा, और उसके कुछ काग़ज़ नीचे गिर गए। आरव ने झुक कर उन्हें उठाया और मेघा की ओर बढ़ाया।
“तुम्हारा पर्स,” उसने कहा।
“धन्यवाद,” मेघा ने हल्की सी मुस्कान दी।
उसके बाद दोनों में हल्की-फुल्की बातचीत शुरू हुई। कभी मौसम की चर्चा, कभी मेट्रो की भीड़ की शिकायत। धीरे-धीरे, बातचीत लंबी होने लगी। किताबों, फिल्मों, और ज़िंदगी के फ़लसफ़ों पर बहसें चलने लगीं।
आरव को मेघा की सोच में गहराई दिखी, और मेघा को आरव की बातें किसी पुराने दोस्त जैसी लगतीं। दोनों ने कभी ये तय नहीं किया कि वे दोस्त बनेंगे, पर दोस्ती अपने आप पनपने लगी।
The Best Love Story : जब दिल धड़कने लगा
एक दिन, मेघा मेट्रो में नहीं आई। आरव बेचैन हो गया। अगला दिन, फिर वही नज़ारा। तीसरे दिन, जब वो फिर नहीं आई, तो उसने पहली बार खुद से पूछा – “क्या मैं उसे मिस कर रहा हूँ?”
चौथे दिन, मेघा आई, पर उसका चेहरा बुझा-बुझा सा था।
“सब ठीक है?” आरव ने पूछा।
मेघा ने सिर झुकाया, “दादी चली गईं। बहुत करीब थीं।“
आरव ने कुछ नहीं कहा, बस उसका हाथ थाम लिया। पहली बार कोई अजनबी इतना अपना सा लगा।
उस दिन के बाद कुछ बदल गया। अब दोनों एक-दूसरे की परछाई बन गए थे। शाम की चाय, किताब की सिफारिशें, छोटी-छोटी खुशियाँ – सब कुछ एक-दूसरे से जुड़ गया।
The Best Love Story : एक मुश्किल मोड़
इसी बीच, मेघा को मुंबई में एक बड़ी कंपनी से नौकरी का ऑफर मिला। ये उसके करियर के लिए एक सुनहरा मौका था। लेकिन इसका मतलब था दिल्ली छोड़ना, और आरव से दूर होना।
वो उलझन में थी।
आरव ने सुना, तो बस मुस्कुरा दिया – “ज़िंदगी के अच्छे मौकों को मत ठुकराना। मैं कहानीकार हूं, मैं इंतज़ार कर सकता हूं।“
“और अगर कहानी अधूरी रह गई?” मेघा ने पूछा।
आरव ने कहा, “कभी-कभी अधूरी कहानियाँ भी सबसे खूबसूरत होती हैं।”
The Best Love Story : दूरी में भी नज़दीकी
मेघा मुंबई चली गई। पर ये दूरी उनका रिश्ता तोड़ नहीं पाई। कॉल्स, मैसेजेस और वीडियो चैट्स के ज़रिए दोनों का रिश्ता और मजबूत हुआ।
आरव ने उसी दौरान एक नई किताब लिखनी शुरू की – “अजनबी जो अपनी सी लगने लगी”।
इस किताब में उसकी और मेघा की कहानी थी। जब उसने किताब पूरी की, उसने एक प्रति मुंबई भेजी।
किताब के आखिरी पन्ने पर लिखा था:
“अब मैं चाहता हूँ, मेरी अगली किताब तुम्हारे साथ बैठे-बैठे लिखूं। क्या तुम लौट आओगी?”
The Best Love Story : वापसी
कुछ हफ्तों बाद, एक सर्द सुबह, वही पुराना मेट्रो स्टेशन। आरव वहीं बैठा किताब पढ़ रहा था। तभी एक जाना-पहचाना स्वर सुनाई दिया — “क्या इस सीट पर कोई बैठ सकता है?”
आरव ने नज़र उठाई। मेघा सामने खड़ी थी, वही मुस्कान, वही आँखें।
“अब कहानी अधूरी नहीं रहेगी,” उसने कहा।