
Best Childish Story : एक खास सपना
नीलू एक सात साल की चंचल और जिज्ञासु लड़की थी जो अपने माँ-पापा के साथ एक छोटे से गाँव में रहती थी। उसे चित्र बनाना बहुत पसंद था। हर रोज़ वह अपने पुराने रंगों से नए-नए चित्र बनाती, पर उसकी एक ही शिकायत थी—“काश मेरे पास जादुई रंग होते जो खुद-ब-खुद बोल सकते!”
एक रात नीलू ने सपना देखा। एक चमकीला रंगीन बादल उसके कमरे में आया और बोला, “नीलू! कल सुबह तुम्हें कुछ खास मिलेगा। उसका सही उपयोग करना, वरना रंग रूठ जाएंगे।”
सुबह उठते ही नीलू को अपने चित्रों के पास एक चमचमाती छोटी डिब्बी मिली। खोलते ही उसमें सात चमकदार रंग निकले—लाल, नीला, पीला, हरा, गुलाबी, नारंगी और बैंगनी।
Best Childish Story : जादुई रंगों की शक्ति
नीलू ने एक चित्र बनाना शुरू किया—एक पेड़, एक पक्षी और एक सूरज। जैसे ही उसने नीला रंग पक्षी पर लगाया, पक्षी बोल पड़ा, “धन्यवाद नीलू! अब मैं उड़ सकता हूँ।”
नीलू चौंक गई, लेकिन जल्दी ही उसे मज़ा आने लगा। उसने पेड़ को रंगा—पेड़ ने मुस्कराकर कहा, “मुझे पानी दो, और मैं फल दूँगा।” सूरज बोला, “अगर बच्चे अच्छे काम करेंगे, तो मैं उन्हें रोशनी और गर्मी दूँगा।”
अब नीलू रोज़ चित्र बनाकर उनसे बातें करने लगी। धीरे-धीरे गाँव के दूसरे बच्चे भी उसके पास आने लगे और मिलकर जादुई चित्रों से खेलते।
Best Childish Story : रंगों की नाराज़गी
एक दिन गाँव के एक अमीर आदमी का बेटा “रवि” आया। उसने जादुई रंग देखे और जबरदस्ती डिब्बी छीनने लगा। नीलू ने मना किया लेकिन रवि ने डिब्बी लेकर अपने घर जाकर चित्र बनाना शुरू कर दिया।
पर जादुई रंग चुप रहे। रवि चिल्लाया, “ये रंग तो झूठे हैं!”
नीलू दुखी होकर घर आई। रात को वही रंगीन बादल फिर आया और बोला, “नीलू, जादू तभी काम करता है जब दिल साफ़ हो। अब तुम्हें कुछ करना होगा।”
Best Childish Story : दोस्ती की जीत
नीलू अगले दिन रवि के पास गई और बोली, “अगर तुम इन रंगों का सही उपयोग करना चाहो, तो मैं तुम्हें सिखा सकती हूँ।” रवि ने शर्मिंदा होकर माफ़ी मांगी।
दोनों ने मिलकर एक बड़ा चित्र बनाया—जिसमें स्कूल, पेड़, बच्चे और जानवर थे। रंगों ने फिर से बोलना शुरू किया। अब पूरे गाँव के बच्चे रोज़ मिलकर बड़े-बड़े चित्र बनाते और उनसे बात करते।
पेड़ ने कहा, “तुम लोग हमें बचाओ, हम तुम्हें फल देंगे।” नदी बोली, “मुझे गंदा मत करो, मैं तुम्हें जीवन दूँगी।”
Best Childish Story : एक नया सपना
अब नीलू का सपना सिर्फ उसका नहीं था, पूरे गाँव का सपना बन गया था। हर घर में बच्चे चित्र बनाते और सीखते—प्रकृति से प्रेम, एक-दूसरे की मदद, और दिल की सफाई।
उस रात नीलू को फिर वही रंगीन बादल सपना में मिला और बोला,
“नीलू, तुमने रंगों को उनका असली मकसद दिखाया—प्रेरणा देना और अच्छाई फैलाना। अब ये रंग तुम्हारे हैं, सदा के लिए।”
नैतिक शिक्षा
“सच्चा जादू हमारे अच्छे कर्मों और साफ़ दिल में होता है। जब हम प्रकृति और दूसरों से प्यार करते हैं, तो रंग खुद-ब-खुद बोलने लगते हैं।”