Best Story For Children : मीरा और उसकी तन्हाई
मीरा सात साल की एक शांत, शर्मीली बच्ची थी। उसका मन स्कूल में नहीं लगता था, क्योंकि उसके दोस्त नहीं थे। जब बच्चे खेलते, वह एक कोने में बैठ जाती और किताबों में खो जाती।
मीरा की मां ने उसका जन्मदिन धूमधाम से मनाया और उसे एक सुंदर सी गुड़िया उपहार में दी। वह गुड़िया खास थी—लाल फ्रॉक, नीली आंखें और चेहरे पर हल्की मुस्कान। मीरा ने उसे “चंपा” नाम दिया।
एक रात जब मीरा रो रही थी, तो अचानक चंपा की आंखों में हल्का सा चमक आया।
“मीरा, तुम रो क्यों रही हो?”
मीरा चौंक गई, “क्या… क्या तुम बोल रही हो?”
“हां, मैं तुम्हारी दोस्त हूं,” चंपा ने मुस्कराते हुए कहा।

Best Story For Children : नई दोस्ती की शुरुआत
अब मीरा हर बात चंपा से करती। स्कूल में जो कुछ होता, घर आकर चंपा को बताती। चंपा उसे सलाह देती, हिम्मत देती और कहानियां सुनाती।
धीरे-धीरे मीरा ने स्कूल में जवाब देना शुरू किया। एक दिन जब एक बच्चा उसका मजाक उड़ा रहा था, तो उसने हिम्मत करके कहा, “मुझे खुद पर भरोसा है। मैं जैसी हूं, वैसी ही ठीक हूं।”
सब हैरान रह गए।

Best Story For Children : सच्चाई का सामना
एक दिन स्कूल में ड्राइंग प्रतियोगिता हुई। मीरा ने जंगल का चित्र बनाया जिसमें जानवर, पेड़ और नदी थी। लेकिन उसकी सहपाठी रीमा ने उसका चित्र फाड़ दिया।
मीरा बहुत रोई और चंपा से शिकायत की।
चंपा बोली, “तुम्हें रीमा से बात करनी चाहिए। सच्चाई का सामना करने से डरना नहीं चाहिए।”
मीरा ने हिम्मत की और रीमा से बोली, “तुम्हें जो किया, वह गलत था। लेकिन मैं तुम्हें माफ करती हूं, क्योंकि मैं सच्ची दोस्ती करना चाहती हूं।”
रीमा चुप रही, फिर शर्मिंदा होकर बोली, “माफ करना मीरा, मैं जल गई थी तुम्हारी पेंटिंग देखकर।”
Best Story For Children : चंपा का राज
एक रात चंपा ने मीरा से कहा, “अब समय आ गया है कि मैं चली जाऊं।”
“नहीं! तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो,” मीरा रो पड़ी।
“मैं हमेशा तुम्हारे अंदर रहूंगी। तुम्हारा आत्म-विश्वास ही असली जादू है।”
सुबह उठते ही चंपा अब एक आम गुड़िया बन गई थी—बिल्कुल शांत।
मीरा मुस्कराई। अब उसे चंपा की आवाज़ की ज़रूरत नहीं थी, क्योंकि वह खुद अपने दिल की आवाज़ सुनना सीख चुकी थी।

नैतिक शिक्षा
“सच्चा आत्म-विश्वास हमारे अंदर होता है। और जो डर को दोस्ती में बदल सके, वही असली बहादुर होता है।”