Site icon therealstory24

“जंगल की अदालत”

बहुत समय पहले की बात है, जब जानवरों का एक बड़ा और खुशहाल जंगल हुआ करता था — जिसका नाम था हरियावन। हरियावन में शेर, हाथी, लोमड़ी, खरगोश, बंदर, भालू, और कई पक्षी आपस में मिल-जुलकर रहते थे। जंगल का राजा शेर “सिंहबहादुर” न्यायप्रिय और समझदार था। हर हफ्ते एक दिन जंगल में “जंगल की अदालत” लगती थी, जहाँ जानवर अपने-अपने मामलों को लेकर आते थे।

The Motivational Story : समस्या की शुरुआत

एक दिन जंगल में अफरा-तफरी मच गई। खरगोश चिंपू जोर-जोर से चिल्लाता हुआ आया और बोला:

“महाराज! मेरी गाजरें चोरी हो गई हैं। मैंने बड़ी मेहनत से अपने खेत में गाजरें उगाई थीं। लेकिन रातोंरात कोई चोर उन्हें ले गया।”

सिंहबहादुर ने गंभीर होकर कहा,

“चिंपू, घबराओ नहीं। हम जंगल की अदालत में इस मुद्दे को रखेंगे। जो भी दोषी होगा, उसे सज़ा मिलेगी।”

अदालत की घोषणा कर दी गई और अगले दिन सारे जानवर सभा में इकट्ठा हुए।

The Motivational Story : अदालत की कार्यवाही

जंगल की अदालत में शेर सिंहबहादुर न्यायाधीश था। हाथी महाराज सहायक, और उल्लू बूढ़ादत्त सलाहकार थे। चिंपू ने सबके सामने अपनी बात रखी।

बंदर बबलू बोला,

“मैंने रात को लोमड़ी झुनझुनी को खेत के पास देखा था। वह कुछ लेकर भाग रही थी।”

लोमड़ी झुनझुनी गुस्से में बोली,

“मैंने कुछ नहीं चुराया। मैं तो अपने बच्चों के लिए खाने की तलाश में थी।”

उल्लू बूढ़ादत्त बोला,

“हमें सच्चाई जानने के लिए खेत का निरीक्षण करना होगा।”

सभी जानवर खेत पर गए। वहां पैरों के निशान मिले — छोटे-छोटे पंजों वाले। उल्लू बोला:

“ये निशान लोमड़ी के नहीं, किसी और के हैं… लगता है कोई चालाक चोर है।”

अब संदेह भालू बल्लू पर गया, क्योंकि उसके पंजे बड़े होते हैं और वह अक्सर देर रात घूमता रहता है।

भालू बोला,

“मैंने कुछ नहीं किया। मैं तो उस रात पेड़ों से शहद निकाल रहा था।”

The Motivational Story : एक नन्हा गवाह

तभी एक नन्हा तोता “मीठू” बोला:

“मैंने देखा है, मैंने देखा है! रात को एक छोटा सा जानवर खेत से गाजरें ले जा रहा था। वह काले रंग का था और फुर्तीला।”

सभी जानवर चौंक गए। उल्लू ने सोचा और बोला:

“ये तो नेवले की निशानी लगती है!”

नेवला मुनक्का बहुत चालाक था और बहुत दिनों से किसी को शक भी नहीं हुआ था। अदालत में उसे बुलाया गया।

शेर सिंहबहादुर ने पूछा,

“क्या तुमने चिंपू की गाजरें चुराई हैं?”

मुनक्का डरते हुए बोला:

“हां महाराज, मैंने ही चुराई थीं। मेरी मां बीमार थी और मेरे पास कुछ खाने को नहीं था। मैंने सोचा कि थोड़ी गाजरें ले लूं, लेकिन फिर लालच में आ गया।”

The Motivational Story : सज़ा नहीं, समाधान

पूरा जंगल शांत हो गया। चिंपू गुस्से में था लेकिन फिर बोला:

“महाराज, अगर मुनक्का की मां बीमार थी, तो उसे मुझसे कहना चाहिए था। मैं गाजरें देने से मना नहीं करता। लेकिन चोरी गलत है।”

शेर सिंहबहादुर बोले:

“मुनक्का, तुम्हें सज़ा तो मिलनी चाहिए, लेकिन जंगल की अदालत का उद्देश्य सज़ा नहीं, सुधार है।”

उन्होंने फैसला सुनाया:

“मुनक्का को अब अगले तीन महीने तक चिंपू के खेत में काम करना होगा। और सबके सामने माफ़ी माँगनी होगी। साथ ही, जंगल में जो जानवर भूखे हैं, उनकी मदद के लिए एक ‘खाद्य बैंक’ बनाया जाएगा।”

सब जानवर तालियाँ बजाने लगे। चिंपू ने मुनक्का को माफ़ कर दिया।

The Motivational Story : नया अध्याय

अब हरियावन में एक नई परंपरा शुरू हुई — “जंगल सेवा दिवस”। हर जानवर हफ्ते में एक दिन किसी न किसी की मदद करता। कोई बीमार को खाना देता, कोई बुजुर्ग जानवरों को सहारा देता।

मुनक्का अब सबसे अच्छा मददगार बन गया था। वह दूसरों की खेतों में काम करता, बच्चों को कहानियाँ सुनाता और जंगल सेवा दिवस का प्रमुख बन गया।

शेर सिंहबहादुर ने एक दिन सभा में कहा:

“गलती करना गलत नहीं, गलती को मानना और सुधारना सबसे बड़ी बहादुरी है।”


Moral Of The Story


चोरी करना गलत है, चाहे कारण कोई भी हो।

मदद माँगने से कोई छोटा नहीं हो जाता।

माफ़ करना और मौका देना समाज को बेहतर बनाता है।

न्याय का उद्देश्य सज़ा नहीं, सुधार होना चाहिए।


Exit mobile version