एक शिक्षाप्रद कहानी : एक गांव, एक लड़का
बड़ापुर नामक एक सुंदर गांव था, जहाँ हरियाली, पशु-पक्षी और सादगी भरी ज़िंदगी थी। वहीं रहता था गुड्डू, एक 11 साल का चंचल, होशियार और सच्चा लड़का।
गुड्डू गरीब था, उसके पापा एक दर्जी थे और मां खेतों में मजदूरी करती थीं। लेकिन उन्होंने गुड्डू को सिखाया था कि चाहे कुछ भी हो, झूठ नहीं बोलना और कभी चोरी नहीं करनी।
गुड्डू की आंखों में बड़े सपने थे – वह अफसर बनकर अपने मां-बाप की गरीबी मिटाना चाहता था।
एक शिक्षाप्रद कहानी : स्कूल और सपनों की दुनिया
गुड्डू रोज़ स्कूल जाता था – पाँच किलोमीटर पैदल चलकर। पुराने कपड़े, घिसी हुई चप्पल, लेकिन मन में उम्मीद की आग।
उसका सबसे अच्छा दोस्त था राजू, जो गांव के सबसे अमीर किसान का बेटा था। दोनों की सोच अलग थी – राजू अक्सर छोटी-छोटी चीजें चुरा लेता और झूठ बोलता।
गुड्डू उसे हमेशा समझाता –
“झूठ का फल कभी मीठा नहीं होता।”
लेकिन राजू हँस देता – “तू तो सीधा है, दुनिया चालाकों की है।”
एक शिक्षाप्रद कहानी : परीक्षा और प्रलोभन
एक दिन स्कूल में साल की सबसे बड़ी परीक्षा होने वाली थी। जो बच्चा प्रथम आता, उसे राज्य स्तर की छात्रवृत्ति और नया साइकिल मिलना था।
गुड्डू दिन-रात पढ़ाई करने लगा। वहीँ राजू को चिंता थी कि वह कैसे पास होगा।
परीक्षा से एक दिन पहले, राजू के पिता ने पैसे देकर स्कूल के एक कर्मचारी से पर्चा खरीद लिया। राजू ने गुड्डू को भी वो पर्चा देने की कोशिश की।
“ले ले यार, देख सब यही कर रहे हैं। तू भी पास हो जाएगा।”
गुड्डू ने दो टूक मना कर दिया –
“मुझे अपने मां-बाप का गर्व चाहिए, न कि झूठ से मिली जीत।”
एक शिक्षाप्रद कहानी : परीक्षा और परिणाम
परीक्षा का दिन आया। गुड्डू ने पूरी ईमानदारी से पेपर दिया। राजू ने नकल की।
एक हफ्ते बाद परिणाम आया – गुड्डू प्रथम आया। पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई।
लेकिन तभी राजू के बारे में खबर फैल गई कि उसने नकल की थी। जांच हुई और उसे डिसक्वालिफाई कर दिया गया।
राजू शर्मिंदा था, और गुड्डू की आंखों में चमक थी – ईमानदारी की चमक।
एक शिक्षाप्रद कहानी : सम्मान और साइकिल
स्कूल में बड़ा कार्यक्रम हुआ। ज़िले के अधिकारी आए और गुड्डू को मंच पर बुलाया गया। उन्होंने कहा:
“गुड्डू जैसे बच्चे भारत का भविष्य हैं। यह साइकिल सिर्फ़ पुरस्कार नहीं, बल्कि ईमानदारी की पहचान है।”
गांव वालों की तालियाँ थमती नहीं थीं। गुड्डू के माता-पिता की आंखों में आंसू थे – गर्व के आंसू।
एक शिक्षाप्रद कहानी : राजू का बदला मन
राजू बाद में गुड्डू के पास आया और बोला,
“माफ़ कर दे यार। तूने सही किया। अब मैं भी कोशिश करूँगा सच्चा बनने की।”
गुड्डू ने मुस्कराकर हाथ बढ़ाया –
“आज से हम सच्चे दोस्त हैं, झूठ से नहीं डर से नहीं।”
एक शिक्षाप्रद कहानी : शिक्षा
समय बीता, गुड्डू आगे पढ़ा और अफसर बन गया। उसने गांव में एक पुस्तकालय बनवाया, जहां हर बच्चा आकर पढ़ सके।
उसने दीवार पर एक वाक्य लिखा:
“ईमानदारी की राह कठिन हो सकती है, लेकिन मंज़िल हमेशा सुंदर होती है।”
कहानी से सीख
सच हमेशा जीतता है।
ईमानदारी सबसे बड़ी पूंजी है।
प्रलोभन से दूर रहना चाहिए।
सच्चे मित्र वही होते हैं जो सही राह दिखाएं।