गप्पू की प्रेरणादायक और हास्यप्रद कहानी : गप्पू और उसकी गप्पें
गप्पू एक छोटे से गाँव “बड़ाखानपुर” का लड़का था। उसका असली नाम था “गणेश प्रसाद वर्मा”, लेकिन गाँव के सारे लोग उसे “गप्पू” कहते थे। अब नाम गप्पू हो और गप्पों का शौक न हो, ऐसा कैसे हो सकता है?
गप्पू जहाँ भी जाता, वहाँ अपनी कहानियाँ लेकर पहुँच जाता। स्कूल में मास्टरजी कुछ पढ़ा रहे होते, तभी गप्पू हाथ खड़ा करता, “मास्टरजी, क्या आपको पता है कि मैं चाँद पर गया था और वहाँ एलियन्स ने मुझे समोसे खिलाए थे?”
सारा स्कूल हँसी से लोटपोट हो जाता और मास्टरजी का चश्मा टेबल पर गिर जाता।
लेकिन गप्पू की ये गप्पें एक दिन मुसीबत बन गईं।
गप्पू की प्रेरणादायक और हास्यप्रद कहानी : परीक्षा और गप्पू का आत्मविश्वास
गाँव के स्कूल में सालाना परीक्षा होने वाली थी। सब बच्चे खूब पढ़ाई कर रहे थे। लेकिन गप्पू? वह तो हर किसी से कह रहा था, “मुझे सब आता है! मैं तो बिना पढ़े ही टॉप करूंगा!”
बबलू ने पूछा, “कैसे?”
गप्पू ने छाती फुलाते हुए कहा, “मैंने एक जादुई तोता पाल रखा है, वही रात को पढ़ाई करता है और सुबह मेरे कान में फूँक मारता है।”
अब बच्चे पढ़ाई छोड़कर गप्पू के तोते को देखने लग गए।
परीक्षा के दिन गप्पू की हालत खराब थी। वह सोच रहा था कि उसका तोता उसकी मदद करेगा, लेकिन तोता खुद पिंजरे में बैठा खाँस रहा था!
गप्पू की प्रेरणादायक और हास्यप्रद कहानी : परीक्षा का नतीजा और गप्पू का झटका
परीक्षा के नतीजे निकले। बबलू, छुटकी, मीना — सब पास हो गए। गप्पू?
गप्पू फेल हो गया।
गप्पू की तो हँसी उड़ गई। सब बच्चे बोले, “अब क्या हुआ गप्पू? एलियन समोसे नहीं लाए क्या?”
गप्पू को बहुत बुरा लगा। वह उदास हो गया और पहली बार उसने अपनी गप्पों पर पछतावा किया।
गप्पू की प्रेरणादायक और हास्यप्रद कहानी : दादी का ज्ञान
गप्पू की दादी, जिसे सब “दादी माँ” कहते थे, बहुत समझदार थीं। उन्होंने गप्पू को पास बुलाया और पूछा, “गप्पू बेटा, तुमने कभी सोचकर गप्प मारी है कि उसका असर क्या होगा?”
गप्पू बोला, “नहीं दादी माँ, मुझे तो बस सबको हँसाना अच्छा लगता था।”
दादी माँ मुस्कुराईं, “हँसाना अच्छी बात है, लेकिन झूठ बोलकर किसी का समय खराब करना गलत है। अगर तुम्हारी गप्पें सीखने लायक होतीं, तो शायद सब तुम्हें पसंद करते, डरते नहीं।”
गप्पू को बात समझ में आई। वह बोला, “दादी माँ, अब मैं गप्पें नहीं मारूंगा। मैं सच्ची मेहनत करूंगा और अपनी कहानियों से लोगों को कुछ सिखाऊंगा।”
गप्पू की प्रेरणादायक और हास्यप्रद कहानी : गप्पू बना प्रेरणा
अगले साल गप्पू ने पढ़ाई में खूब मेहनत की। अब वो गप्पें नहीं मारता था, बल्कि अपनी कहानियों में मज़ा भी रखता और सीख भी।
जैसे एक दिन उसने बच्चों को कहानी सुनाई:
“एक बकरी थी, जो पढ़ाई नहीं करती थी। एक दिन वह जंगल में गई और वहाँ शेर ने पूछा, ‘2 गुणा 2 कितना?’ बकरी बोली, ‘22’। शेर ने कहा, ‘गलत जवाब! अब तुम मेरी किताबें पढ़ो।’ और बकरी बनी सबसे समझदार बकरी!”
सारे बच्चे हँसे और बोले, “गप्पू भाई, अब मजा भी है और सीख भी!”
स्कूल की वार्षिक सभा में गप्पू को बुलाकर मास्टरजी ने कहा, “इस साल का सबसे प्रेरणादायक छात्र है — गप्पू!”
गप्पू शर्माकर बोला, “अब मैं सिर्फ गप्पू नहीं, ज्ञानू गप्पू हूँ!”
सीख (Moral of the Story)
झूठी बातें मजेदार हो सकती हैं, लेकिन उनका असर नुकसानदायक होता है।
मेहनत से ही असली सफलता मिलती है।
हास्य और प्रेरणा को एक साथ मिलाकर हम दूसरों को खुश भी कर सकते हैं और कुछ सिखा भी सकते हैं।