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“अधूरी दीवार” : एक प्रेरणादायक कहानी जो जीवन के संघर्ष, आत्म-विश्वास और धैर्य की ताक़त को दर्शाती है

अर्जुन की प्रेरणादायक कहानी : गाँव की सुबह

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव “सरसई” में सुबह की किरणें जब खेतों की हरियाली पर पड़ती थीं, तो ऐसा लगता था मानो प्रकृति खुद जीवन की उम्मीद बाँट रही हो। यही गाँव था अर्जुन का — एक 15 वर्षीय लड़का जो दूसरों से अलग था। न शारीरिक रूप से बलशाली, न पढ़ाई में अव्वल, लेकिन एक बात जो उसे खास बनाती थी — उसका हौसला।

अर्जुन का सपना था एक बड़ा इंजीनियर बनना। पर उसके हालात कुछ और ही कहानी कहते थे। पिता किसान थे और परिवार की हालत इतनी कमजोर थी कि स्कूल की फीस भरने के लिए भी सोच-समझकर खर्च करना पड़ता था।



अर्जुन की प्रेरणादायक कहानी : संघर्ष की शुरुआत

एक दिन स्कूल में विज्ञान शिक्षक ने कहा,
“जो भी इस बार विज्ञान प्रोजेक्ट प्रतियोगिता में विजेता बनेगा, उसे राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भेजा जाएगा।”

अर्जुन की आँखों में चमक आ गई। ये मौका था कुछ कर दिखाने का, लेकिन उसके पास न तो अच्छे साधन थे और न किसी का समर्थन।

दोस्तों ने मज़ाक उड़ाया,
“तू क्या करेगा अर्जुन? तेरे पास तो सामान खरीदने तक के पैसे नहीं!”

अर्जुन ने कुछ नहीं कहा, बस चुपचाप स्कूल के पीछे पड़े टूटे कबाड़ से सामान उठाकर एक छोटा-सा मॉडल बनाना शुरू कर दिया — “पानी से बिजली बनाने की मशीन”।

हर दिन स्कूल के बाद वह खेतों में पिता के साथ काम करता और रात में ढिबरी की रोशनी में अपना प्रोजेक्ट बनाता।



अर्जुन की प्रेरणादायक कहानी : पहली असफलता

प्रतियोगिता का दिन आया। अर्जुन का प्रोजेक्ट सबसे साधारण था — पुरानी बोतलें, कुछ तार और एक साइकिल की डाइनमो। जबकि बाकी छात्रों ने महंगे, चमकदार मॉडल पेश किए।

निर्णायक मंडल ने नतीजे सुनाए — अर्जुन का नाम नहीं था।

वह टूटा नहीं, बस बाहर जाकर चुपचाप बैठ गया।

तभी विज्ञान शिक्षक बाहर आए और बोले,
“तुम्हारा मॉडल तकनीकी रूप से अद्भुत था, लेकिन उसकी प्रस्तुति कमजोर थी। अगर मेहनत जारी रखी, तो तुम एक दिन ज़रूर जीतोगे।”

अर्जुन ने सिर उठाया और बस यही कहा,
“मैं हार नहीं मानूंगा, सर।”



अर्जुन की प्रेरणादायक कहानी : ‘अधूरी दीवार’ की सीख

अर्जुन के घर के पीछे एक अधूरी दीवार थी, जिसे उसके दादा ने बनवाना शुरू किया था लेकिन बीमारी के कारण अधूरी रह गई। अर्जुन रोज़ उस दीवार के पास बैठता और सोचा करता — “अगर मैं इसे पूरा कर दूं, तो शायद कुछ अच्छा कर पाऊँ।”

एक दिन उसने फैसला किया —
“मैं इस दीवार को पूरा करूंगा। लेकिन ईंटें खरीदने के पैसे नहीं हैं। तो क्या?”

वह गाँव के निर्माण स्थल से फेंकी गई टूटी ईंटें बटोरने लगा। धीरे-धीरे, ईंट दर ईंट, अकेले अपने हाथों से वह दीवार बनाता गया।

गाँव के लोग पहले हँसते थे, लेकिन कुछ हफ्तों बाद वही लोग उसकी मेहनत को देखकर दंग रह गए।

उस अधूरी दीवार को अर्जुन ने न केवल पूरा किया, बल्कि उस पर खुद से बनाई एक छोटी सोलर मशीन भी लगाई, जिससे रात को बल्ब जलने लगा।



अर्जुन की प्रेरणादायक कहानी : नई राह की ओर

गाँव के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने यह देखा और अर्जुन को पास के शहर में आयोजित एक विज्ञान मेले में ले जाने का प्रस्ताव रखा। अर्जुन ने उसी सोलर मशीन को नए तरीके से तैयार किया और मेले में प्रदर्शित किया।

इस बार निर्णायकों की नज़रें उसी पर टिकी थीं।

“बिना किसी बाहरी मदद के, खुद से बनाया गया यह मॉडल ग्रामीण इलाकों में बिजली संकट का समाधान बन सकता है,” जज ने कहा।

अर्जुन ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता जीत ली। उसके नाम की खबर अखबारों में छपी —
“गाँव के लड़के ने किया चमत्कार: कबाड़ से बनाई बिजली!”



अर्जुन की प्रेरणादायक कहानी : वास्तविक सफलता की शुरुआत

राज्य सरकार ने अर्जुन की प्रतिभा को देखकर उसे मुफ्त शिक्षा की सुविधा दी। वह शहर के नामी स्कूल में पढ़ने लगा। वहाँ भी कई तरह की चुनौतियाँ थीं — नए वातावरण, नई भाषा, पढ़ाई का दबाव — लेकिन अर्जुन ने कभी हार नहीं मानी।

उसकी ‘अधूरी दीवार’ अब एक प्रतीक बन चुकी थी — अधूरे सपनों को पूरा करने की।

कुछ वर्षों बाद, अर्जुन ने देश के सबसे बड़े तकनीकी संस्थान से इंजीनियरिंग पूरी की। फिर उसने गाँव में लौटकर एक “ग्रीन इनोवेशन सेंटर” की स्थापना की, जहाँ गाँव के बच्चे विज्ञान की शिक्षा पाते और नए प्रयोग करते।



अर्जुन की प्रेरणादायक कहानी : अंत नहीं, शुरुआत है यह

एक पत्रकार ने अर्जुन से पूछा —
“आपको सबसे बड़ी प्रेरणा किससे मिली?”

अर्जुन मुस्कराया और बोला,
“एक अधूरी दीवार से। उसने मुझे सिखाया कि अगर इरादा मजबूत हो, तो सबसे टूटी चीज भी सबसे बड़ा सबक बन सकती है।”



अर्जुन की प्रेरणादायक कहानी : सीख (Moral of the Story)

हार मत मानो — असफलता ही सफलता की पहली सीढ़ी है।

कम संसाधनों में भी चमत्कार हो सकते हैं, अगर मेहनत और जज़्बा हो।

हर अधूरी चीज़ एक नई शुरुआत का संकेत हो सकती है।

बड़े सपने देखने का अधिकार हर किसी को है, चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि से क्यों न आता हो।


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