एक सांस्कृतिक हिंदी कहानी : गांव की सुबह
राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र का एक छोटा-सा गांव ‘कुंडलिया’, अपनी रंगीन संस्कृति और लोक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध था। वहां की हवेलियाँ, माटी के घर, और रंग-बिरंगे वस्त्रों में लिपटे लोग, मानो किसी चित्रकार की कल्पना से निकले पात्र हों।
गांव की सुबह मिट्टी की सोंधी खुशबू, चरागाह में घूमती गायें, और मंदिर की घंटियों से होती थी। फाल्गुन का महीना था, और पूरा गांव होली की तैयारियों में डूबा था। पर इस बार की होली कुछ खास थी — गांव के ठाकुर साहब के पोते, वीर, वर्षों बाद अमेरिका से लौटे थे।

एक सांस्कृतिक हिंदी कहानी : वीर की वापसी
वीर दस वर्षों से न्यूयॉर्क में रह रहा था। उसने वहीं इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी भी पा ली थी। लेकिन दिल में कहीं एक खालीपन था, जो उसकी जड़ों से कट जाने का दर्द बन गया था। दादी की लिखी चिट्ठियों ने उसकी नींदें चुरा ली थीं।
जब दादी ने होली पर गांव आने का निमंत्रण भेजा, तो वह सब कुछ छोड़कर आ गया।

एक सांस्कृतिक हिंदी कहानी : दादी का आंगन
वीर की दादी, दादीसा, गांव की प्रतिष्ठित महिला थीं। पगड़ी पहने, सफेद धोती में लिपटी, उनके चेहरे की झुर्रियाँ मानो अनुभव की इबारत हों। दादीसा का आंगन बड़ा था – एक ओर तुलसी चौरा, दूसरी ओर मिट्टी का चूल्हा और बीचोंबीच आम का पेड़।
“आ गया म्हारो शेर!” दादीसा ने वीर को गले लगाते हुए कहा।
वीर की आंखें नम हो गईं। वर्षों की दूरी एक ही आलिंगन में पिघल गई।

एक सांस्कृतिक हिंदी कहानी : रंगों की तैयारी
गांव की गलियों में होली की चहल-पहल थी। महिलाएं गुलाल पीस रहीं थीं, बच्चे पिचकारियाँ रंग रहे थे और पुरुष ढोलक की थाप पर फाग गा रहे थे।
वीर को यह सब देख कर जैसे कोई भूला हुआ सपना याद आ गया। उसने पहली बार देखा कि कैसे इमली, पलाश के फूल, चुकंदर, और हल्दी से रंग बनाए जाते थे। उसके अमेरिका में खरीदे गए केमिकल रंगों की तुलना में यह कहीं ज्यादा जीवंत था।
“बेटा, होली सिर्फ रंगों का नहीं, संस्कारों और प्रेम का त्योहार है,” दादीसा ने मुस्कुराते हुए कहा।

एक सांस्कृतिक हिंदी कहानी : गांव की संस्कृति का पाठ
वीर की मुलाकात गौरवी से हुई – गांव के स्कूल में पढ़ाने वाली शिक्षिका। गौरवी ने उसे गांव की संस्कृति, लोकगीतों, और पारंपरिक होली की रस्मों के बारे में बताया।
“क्या तुम्हें पता है,” गौरवी ने कहा, “हमारे यहां होली से पहले फगुआ गीतों की रातें होती हैं, जहां स्त्रियां अपने दुःख-सुख गीतों में उड़ेलती हैं?”
वीर ने ध्यान से सुना – एक लोकगीत:
“फागुन आयो रे, मोरे साजन के अंगना,
रंग बरसावे बदरिया, प्रेम रंग से भिगोना…”
उसकी आंखों में चमक थी। उसे अपनी मिट्टी की महक महसूस होने लगी थी।

एक सांस्कृतिक हिंदी कहानी : होली की रात
होली से एक दिन पहले होलिका दहन की रस्म होती थी। गांव के लोग लकड़ियां, गोबर के उपले और सूखे पत्ते जमा करते। गांव की सबसे वृद्ध महिला, इस बार दादीसा, अग्नि जलातीं।
जब अग्नि जली, वीर ने गौर किया – हर व्यक्ति अग्नि में अपने अहंकार, राग-द्वेष और बुराईयों की प्रतीक लकड़ियां डाल रहा था।
“ये सिर्फ आग नहीं, बेटा, आत्मशुद्धि है,” दादीसा ने बताया।
वीर ने भी एक टहनी डाली – अपने अंहकार की। उसे अब अहसास हुआ, कि उसने आधुनिकता के नाम पर अपनी संस्कृति को पीछे छोड़ दिया था।

एक सांस्कृतिक हिंदी कहानी : रंगों की सुबह
अगली सुबह पूरा गांव रंगों में भीग चुका था। बच्चे, बूढ़े, महिलाएं – सभी एक दूसरे को गुलाल लगा रहे थे।
वीर ने गौरवी को रंग लगाते हुए कहा, “ये सिर्फ एक रंग नहीं, तुम्हारे विचारों का सम्मान है।”
गौरवी मुस्कुरा दी।
फिर गांव के फाग मंडल ने मालपुरा राग में एक परंपरागत फाग गीत गाया:
“मोरे रंग दे चुनरिया, सजनवा हो…
पिया संग खेलूं होली, मधुबन मां…”
वीर ने ढोलक उठाया – पहली बार! उसके हाथों में ताल थी, लेकिन आंखों में आंसू।

एक सांस्कृतिक हिंदी कहानी : परिवर्तन की बयार
वीर ने फैसला किया – वह हर साल होली गांव में मनाएगा। नहीं, सिर्फ त्योहार के लिए नहीं, बल्कि गांव के बच्चों को डिजिटल शिक्षा देने के लिए भी। वह अपने पैसों से गांव में एक डिजिटल लाइब्रेरी खोलना चाहता था।
गौरवी ने साथ देने का वादा किया।
“तुम गांव के हो, और गांव तुम्हारा,” दादीसा ने आशीर्वाद दिया।

एक सांस्कृतिक हिंदी कहानी : एक साल बाद
एक साल बाद फिर होली आई। पर अब कुंडलिया में एक बदलाव था – बच्चे टैबलेट पर पढ़ रहे थे, गांव की स्त्रियां डिजिटल कौशल सीख रही थीं, और वीर व गौरवी की सगाई हो चुकी थी।
परंपरा और प्रगति का मेल, जैसे दो रंग एक साथ मिलकर नई छटा बनाते हैं।

एक सांस्कृतिक हिंदी कहानी : समाप्ति
यह कहानी न केवल संस्कृति का उत्सव है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे परंपरा और आधुनिकता एक साथ चल सकती हैं। गांव, परिवार, त्योहार और शिक्षा – जब ये सब मिलते हैं, तब ही असली रंगों का त्योहार होता है।