प्रेरणा की पगदंडी : अनजान राह
राजस्थान के एक छोटे से गांव ‘धौलपुर’ में रहने वाला रामकुमार एक सीधा-सादा युवक था। उसके पास ना बड़ी डिग्री थी, ना कोई पैसा, लेकिन एक सपना था—शहर जाकर अपनी पहचान बनाना।
रामकुमार का सपना था कि वह एक दिन ऐसा स्कूल खोले जहाँ गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा मिल सके। लेकिन गाँव में यह सपना सुनकर लोग हँसते थे। “तू शहर जाएगा? और स्कूल खोलेगा? तेरा सपना तेरे बैल के जितना बड़ा है,” बूढ़े रामधनी काका कहते।
एक दिन, रामकुमार अपने छोटे से झोले में कुछ कपड़े, माँ की दी हुई रोटियाँ और पिता की तस्वीर लेकर निकल पड़ा। शहर तक जाने वाली पगडंडी पर वह अकेला चल पड़ा, लेकिन उसे नहीं पता था कि आगे की राह में कौन-कौन से अजनबी उसका जीवन बदलने वाले हैं।
प्रेरणा की पगदंडी : पहला अजनबी – चाय वाला इमरान
रामकुमार भूख और थकान से परेशान एक रेलवे स्टेशन के पास बैठा था, जब एक चायवाले ने उसे आवाज़ दी, “अरे भैया, गर्म चाय पी लो, फ्री है आज के लिए।”
रामकुमार ने सिर उठाकर देखा—चायवाला मुस्कुरा रहा था। नाम था इमरान।
“क्यों फ्री में दे रहे हो?”
“क्योंकि तू थका-हारा दिख रहा है, और इंसानियत यही सिखाती है,” इमरान बोला।
इमरान ने रामकुमार से उसका हाल पूछा। जब राम ने अपने सपने के बारे में बताया, तो इमरान ने कहा, “मैं ज्यादा नहीं कर सकता, लेकिन अगर चाहो तो मेरी दुकान पर काम कर लो। दिन भर काम करोगे, तो रात में थोड़ा पढ़ भी सकते हो।”
रामकुमार ने विनम्रता से सिर हिलाया और वहीं से उसने अपने सफर की असली शुरुआत की।
प्रेरणा की पगदंडी : दूसरा अजनबी – लाइब्रेरी वाली शालिनी मैडम
इमरान की दुकान के पास एक पुरानी लाइब्रेरी थी। रामकुमार का पढ़ने का शौक उसे वहाँ खींच लाया। लेकिन अंदर घुसते ही एक सख्त आवाज़ आई, “यह कोई चाय की दुकान नहीं है!”
वह थी शालिनी मैडम, जो उस लाइब्रेरी की देखरेख करती थीं।
रामकुमार ने विनम्रता से कहा, “मैडम, मुझे सिर्फ किताबें पढ़नी हैं। मैं पैसे नहीं दे सकता, लेकिन सफाई कर दूँगा, या जो कहें, कर दूँगा।”
शालिनी मैडम कुछ पल चुप रहीं, फिर बोलीं, “अगर तुम सच में पढ़ना चाहते हो, तो मैं तुम्हारी मदद करूँगी। लेकिन शर्त है—हर दिन एक नई बात सीखकर बताओगे।”
रामकुमार ने वो शर्त खुशी से मान ली। धीरे-धीरे, उसने विज्ञान, गणित और समाजशास्त्र की किताबें पढ़नी शुरू कीं।
प्रेरणा की पगदंडी : तीसरा अजनबी – इंस्पेक्टर मलिक
एक दिन लाइब्रेरी बंद थी और रामकुमार रास्ते में घूम रहा था, तभी उसे एक एक्सीडेंट दिखा। भीड़ में कोई आगे नहीं आया। रामकुमार ने दौड़कर घायल बच्चे को अस्पताल पहुँचाया।
वहीं एक पुलिसवाला खड़ा देख रहा था—इंस्पेक्टर मलिक।
“तुमने बहुत अच्छा काम किया।” मलिक बोले, “तुम्हारा नाम?”
“रामकुमार।”
“कहां से हो?”
“धौलपुर गाँव से।”
मलिक ने कुछ देर सोचा, फिर कहा, “अगर तुम्हें अपने जैसे औरों की मदद करनी है, तो सिविल सर्विसेज की तैयारी करो। मैं तुम्हें गाइड करूँगा।”
रामकुमार को लगा जैसे कोई अनदेखी शक्ति उसकी राह आसान कर रही है।
प्रेरणा की पगदंडी : संघर्षों की अग्निपरीक्षा
लेकिन किस्मत हमेशा आसान नहीं होती।
इमरान की दुकान में आग लग गई, जिससे रामकुमार की नौकरी चली गई।
शालिनी मैडम की तबीयत बिगड़ गई, जिससे लाइब्रेरी बंद हो गई।
मलिक का तबादला हो गया।
अब रामकुमार फिर अकेला था।
वो भूखा रहने लगा, सड़कों पर सोने लगा। कई बार लगा कि वापस गाँव चला जाए। लेकिन एक दिन उसने अपने पिता की तस्वीर देखी और याद किया, “बेटा, सपने वही पूरे होते हैं, जिनका पीछा तू हारने के बाद भी करता है।”
रामकुमार ने फुटपाथ पर बैठकर फिर से पढ़ना शुरू किया। किसी ने देखा, तो कोई हँसा, कोई चिढ़ाया, लेकिन कोई-किसी ने उसे एक पुरानी किताब दी, कोई बोतल में पानी भर लाया।
अब अजनबी सिर्फ रास्ता रोकने वाले नहीं थे, कुछ राह बनाने वाले भी थे।
प्रेरणा की पगदंडी : सफलता की सुबह
दो साल बीते।
रामकुमार ने अपने पुराने संपर्कों को जोड़ा। शालिनी मैडम अब ठीक थीं और उन्होंने उसे एक पुरानी बिल्डिंग दिलाई जहाँ वह छोटा स्कूल खोल सके।
इमरान ने चाय की दुकान फिर से खोली और बच्चों के लिए मुफ्त नाश्ता देने का वादा किया।
मलिक सर ने उसकी UPSC फॉर्म भरी और प्रोत्साहन दिया।
रामकुमार ने स्कूल खोला, नाम रखा—”पगडंडी स्कूल: हर सपने को राह देने वाला।”
बच्चे आने लगे—गरीब, बेसहारा, अजनबी—जैसे वो कभी खुद था।
प्रेरणा की पगदंडी : वो अब अजनबी नहीं रहा
रामकुमार अब अजनबी नहीं रहा था।
वह दूसरों के लिए वो राह बन चुका था, जो कभी इमरान, शालिनी, और मलिक ने उसके लिए बनाई थी।
एक दिन एक छोटा लड़का आया, गंदे कपड़े पहने, भूखा, डरा हुआ। रामकुमार ने उसका हाथ थामा और कहा, “बेटा, चिंता मत कर। अब तेरा सपना तुझसे कोई नहीं छीन सकता।”
लड़के ने पूछा, “आप कौन हो अंकल?”
रामकुमार ने मुस्कराकर कहा, “एक अजनबी… जो अब तुम्हारा अपना बन गया है।”
प्रेरणा की पगदंडी : सीख
कभी-कभी जिनसे हम पहली बार मिलते हैं, वही हमारे जीवन के सबसे बड़े मार्गदर्शक बन जाते हैं।
हर अजनबी बुरा नहीं होता; कुछ ऐसे भी होते हैं जो आपको खुद से बेहतर बना जाते हैं।
संघर्ष जीवन का हिस्सा है, लेकिन जो उससे सीखता है, वही असली विजेता होता है।