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Most Popular Dangerous Horror Story : चुड़ैल की हवेली

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव “धनौरी” में एक पुरानी हवेली खंडहर की शक्ल में खड़ी थी। गाँव वाले उसे “चुड़ैल की हवेली” कहते थे। कहते हैं वहां एक भयानक आत्मा रहती है — एक औरत की जो सौंदर्य में अद्वितीय थी लेकिन मरने के बाद चुड़ैल बन गई।

शुरुआत

यह कहानी शुरू होती है राहुल से, जो एक शहर का लड़का था और रिसर्च स्कॉलर था। उसे भारतीय ग्रामीण किंवदंतियों पर रिसर्च करनी थी। जब उसने धनौरी के बारे में पढ़ा, तो चुड़ैल की हवेली में गहरी रुचि जागी।

राहुल गाँव पहुंचा, और वहां के बुज़ुर्गों से बातें करने लगा। सबने उसे चेताया कि हवेली के पास न जाए। “बेटा, जो भी गया, लौट कर नहीं आया,” बूढ़ा हरनाम सिंह बोला। लेकिन राहुल को इन बातों पर यकीन नहीं हुआ। उसने सोचा ये सब अंधविश्वास है।

हवेली की पहली रात

राहुल ने तय किया कि वो हवेली में रात बिताएगा। गांव वालों ने उसे मना किया, लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी। रात को 10 बजे वह अपने कैमरे और रिकॉर्डर के साथ हवेली में दाखिल हुआ।

हवेली अंदर से जर्जर थी, दीवारें उखड़ी हुई थीं, और एक अजीब सन्नाटा था। राहुल ने एक कमरे में डेरा जमाया और रिकॉर्डिंग शुरू की।

घड़ी ने 12 बजाए। अचानक हवेली की खिड़कियां खुद-ब-खुद बंद होने लगीं। एक ठंडी हवा चली, और राहुल के कैमरे में सफेद धुंध सी चीज़ दिखने लगी। तभी एक औरत की चीख सुनाई दी — “क्यों आए हो यहां?”

राहुल घबरा गया लेकिन उसने खुद को संभाला और कैमरे की फ्लैश लाइट के सहारे उस दिशा में गया। उसे एक शीशा दिखा, जिसमें एक औरत का प्रतिबिंब था — सफेद साड़ी, बिखरे बाल, लाल आंखें।

पिछली कहानी

अगले दिन राहुल वापस गाँव आया, लेकिन बेहद सहमा हुआ था। उसने तय किया कि पहले उसे हवेली की असली कहानी जाननी होगी।

गाँव की एक बूढ़ी औरत, जमुना बाई, ने बताया:

“बहुत साल पहले, हवेली में ठाकुर अर्जुन सिंह रहते थे। उनके नौकरों में से एक सुंदर लड़की ‘चम्पा’ थी। ठाकुर की उस पर गंदी नजर थी। जब चम्पा ने इंकार किया, तो ठाकुर ने उसे हवेली के तहखाने में ज़िंदा दफना दिया। उसकी मौत के बाद से, हवेली में अजीब घटनाएं होने लगीं।”

कहते हैं चम्पा की आत्मा बदले की आग में जल रही है और अब वो किसी को भी ज़िंदा नहीं छोड़ती जो हवेली में कदम रखे।

रहस्यमयी घटनाएं

राहुल ने इस कहानी को रिकॉर्ड किया और दोबारा हवेली जाने का मन बनाया — लेकिन इस बार गाँव के दो लड़के भी उसके साथ गए: मोहित और अर्जुन।

तीनों ने शाम होते-होते हवेली में कदम रखा। वे तहखाने की ओर बढ़े। रास्ते में एक दीवार पर ताजा खून के छींटे दिखे। फिर, एक कमरा खुला — जिसमें कुछ अजीब सा तावीज़ पड़ा था और एक डायरी।

राहुल ने डायरी खोली, जिसमें लिखा था:

“मैं चम्पा हूँ। मेरी आत्मा मुक्त नहीं हो पाई। जिसने मुझे मारा, वो चैन से सो गया, पर अब मैं किसी को भी चैन से नहीं सोने दूंगी। जब तक मेरी हड्डियाँ गंगा में विसर्जित नहीं होतीं, मैं हर आत्मा को अपनी बना लूंगी…”

जैसे ही उन्होंने आखिरी पन्ना पढ़ा, दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया। कमरे की बत्तियाँ टिमटिमाने लगीं और हवा रुक गई।

फिर — एक चीख। मोहित अचानक गायब हो गया।

मौत की रात

राहुल और अर्जुन डर के मारे कमरे से बाहर भागे, लेकिन हवेली का रास्ता खत्म हो चुका था। वे बार-बार घूमते लेकिन हर बार वहीं पहुँचते।

एक कमरे में उन्हें मोहित मिला — लेकिन वो हवा में उल्टा लटका हुआ था, उसकी आंखें सफेद, और मुंह से खून निकल रहा था। तभी पीछे से एक आवाज़ आई — “अब तुम बचे नहीं रहोगे…”

चम्पा की आत्मा प्रकट हुई। उसकी आंखें आग जैसी जल रही थीं, और वह हवा में तैर रही थी। उसने अर्जुन को पकड़ लिया और कहा — “तुम भी ठाकुर की औलाद हो!”

राहुल ने जल्दी से डायरी में लिखी बात याद की — हड्डियों का गंगा में विसर्जन। उसने आत्मा से कहा — “मैं तुम्हारी मुक्ति चाहता हूँ। मुझे बताओ तुम्हारी हड्डियाँ कहाँ हैं?”

चम्पा कुछ पल को रुकी। फिर जमीन दरकी और एक कंकाल बाहर आया। राहुल ने कंकाल को कपड़े में लपेटा और बाहर भागा। हवेली ने खुद रास्ता दिया। जैसे ही उसने हवेली से बाहर कदम रखा, हवेली ज़ोर से कांपी और सब शांत हो गया।

मुक्ति

अगली सुबह राहुल ने गाँव वालों के साथ जाकर हड्डियों का गंगा में विधिवत विसर्जन किया। विसर्जन के साथ ही, हवेली में एक तेज़ प्रकाश फैला और एक औरत की आवाज़ आई — “धन्यवाद…”

मोहित और अर्जुन की आत्माएं नहीं मिलीं, लेकिन हवेली अब शांत थी। गाँव वाले कहते हैं, अब वहां कोई बुरी आत्मा नहीं है।

राहुल ने इस अनुभव को अपने रिसर्च पेपर में लिखा, लेकिन कभी किसी और हवेली की खोज नहीं की। कहते हैं, जिसने एक बार मौत को करीब से देखा हो, उसे दोबारा देखने की ज़रूरत नहीं होती।


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