“आरती… देर हो रही है।”
दरवाज़े के नीचे से एक काली परछाईं अंदर फैलने लगी। परछाईं इंसान जैसी नहीं थी—उसके हाथ ज़मीन पर रेंग रहे थे।
आरती पीछे हटी। तभी उसे दिखा—उसके फ्लैट के अंदर एक और दरवाज़ा था, जो उसने पहले कभी नोटिस नहीं किया था।
उस दरवाज़े पर लिखा था—