“गुब्बारे वाला भालू”

जंगल का नया मेहमान

बहुत समय पहले की बात है। एक सुंदर और शांत जंगल था—नीले आकाश के नीचे हरे-भरे पेड़ों से भरा हुआ। उस जंगल में कई जानवर रहते थे—लंगूर, खरगोश, हिरण, तोता, और हाथी भी। सब मिल-जुलकर खुशी-खुशी रहते थे।

एक दिन जंगल में एक नया मेहमान आया। वह था एक मोटा-सा, भूरे रंग का भालू, जिसकी पीठ पर एक बड़ा बैग था, और उसके हाथ में रंग-बिरंगे गुब्बारों का गुच्छा था।

“अरे! ये कौन है?” सब जानवर हैरान थे।

भालू मुस्कराया और बोला, “मैं हूँ बल्लू भालू! मैं गुब्बारे बेचता हूँ! दुनिया भर में घूमकर बच्चों को खुश करता हूँ।”

सभी जानवरों ने तालियाँ बजाईं। बच्चों ने दौड़कर उसके पास आकर गुब्बारे मांगे। बल्लू भालू ने सबको एक-एक गुब्बारा दिया—लाल, नीला, पीला, हरा… सब रंगों के।

“ध्यान से उड़ाना,” उसने हँसते हुए कहा।


गुब्बारों की जादूई बात

छोटे-छोटे जानवरों को बड़ा मज़ा आ रहा था। नन्हे खरगोश ने नीला गुब्बारा उड़ाया और वह हवा में ऊपर-ऊपर उड़ गया। तभी गुब्बारे से एक हल्की-सी रोशनी निकली और उसमें से एक नन्ही परी प्रकट हुई।

“धन्यवाद! तुमने मुझे आज़ाद किया!” वह बोली।

सभी जानवर दंग रह गए।

“क्या ये कोई जादू है?” तोते ने पूछा।

बल्लू भालू मुस्कराया और बोला, “हाँ! ये कोई साधारण गुब्बारे नहीं हैं। हर गुब्बारे में एक छोटी-सी कहानी, एक छोटी-सी खुशी छिपी है।”

बच्चों ने जब-जब गुब्बारे उड़ाए, कुछ न कुछ जादू हुआ—कहीं से इंद्रधनुष निकला, कहीं मिठाई की वर्षा हुई, तो कहीं एक जादुई बांसुरी प्रकट हो गई जो खुद-ब-खुद संगीत बजाती थी।


शरारती बंदर की चाल

पर हर जगह अच्छाई हो, ये जरूरी नहीं। जंगल में एक शरारती बंदर भी रहता था—झुनझुन नाम का। वह सबकी चीज़ें चुराता, मस्ती करता और कभी-कभी दूसरों को दुखी भी कर देता।

जब उसे गुब्बारों के जादू के बारे में पता चला, तो उसने सोचा, “अगर मैं सारे गुब्बारे चुरा लूँ, तो सारा जादू मेरा हो जाएगा!”

उसने रात में चुपके से बल्लू भालू का बैग उठाया और एक पेड़ पर चढ़ गया। लेकिन जैसे ही उसने बैग खोला, सभी गुब्बारे आसमान में उड़ गए।

झुनझुन ने एक गुब्बारा पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह हवा में घूम गया और बंदर का संतुलन बिगड़ गया। वह पेड़ से गिर गया—धप्प!

सौभाग्य से, बल्लू भालू ने उसे देख लिया और दौड़कर उसकी मदद की।


माफ़ी और बदलाव

झुनझुन को बहुत शर्म आई। वह बोला, “मुझे माफ़ कर दो बल्लू भालू। मुझे लालच आ गया था। अब मैं बदल जाऊँगा।”

भालू ने मुस्कराकर उसका हाथ थामा और कहा, “हर कोई गलती करता है, लेकिन जो अपनी गलती माने, वह बड़ा बन जाता है।”

उस दिन से झुनझुन भी बच्चों की मदद करने लगा। वह गुब्बारे नहीं चुराता, बल्कि उन्हें पकड़कर छोटे बच्चों को देता।


गुब्बारों का त्योहार

कुछ महीनों बाद जंगल में एक खास त्योहार मनाया गया—“गुब्बारों का त्योहार”। उस दिन पूरा जंगल रंग-बिरंगे गुब्बारों से सजाया गया। बल्लू भालू ने सभी को खास गुब्बारे दिए, जिनमें नई-नई कहानियाँ छिपी थीं।

बच्चों ने झुनझुन के साथ मिलकर नाटक किया—“झुनझुन की शरारत और उसका बदलता दिल”। सबने खूब ताली बजाई।

अंत में बल्लू भालू ने कहा, “एक गुब्बारा तुम्हारे हाथ में नहीं, दिल में होता है—जिसमें होती है दोस्ती, अच्छाई और मस्ती।”


कहानी का संदेश

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि गलतियाँ सब करते हैं, लेकिन उन्हें स्वीकार करना और बदलना सबसे बड़ा गुण है। दूसरों को खुश करना सबसे बड़ी खुशी है और सबसे जरूरी बात—हर दिल में एक जादू होता है, बस उसे पहचानने की ज़रूरत है।


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