हरिपुर एक छोटा-सा शहर था — शांत, हरियाली से भरा, जहाँ बच्चे खुले मैदानों में खेलते और बड़ों के पास कहानियों का खज़ाना होता।
इसी शहर में रहता था दस साल का आरव, जो अपनी उम्र से कहीं ज्यादा जिज्ञासु था।
आरव को नयी चीजें जानना, सपनों की दुनिया में खो जाना और किताबों की कहानियों में खुद को पाना बेहद अच्छा लगता था।
उसके पास एक पुरानी डायरी थी, जिसमें वह उन सभी जगहों का जिक्र करता था जहाँ वह कभी जाना चाहता था — जैसे उड़ने वाला शहर, बातें करने वाले जानवरों का गाँव, समय में पीछे जाने वाली सुरंग वगैरह।
लेकिन उसे क्या पता था कि उसकी जिंदगी एक दिन सचमुच बदलने वाली है।

रहस्यमयी दरवाजा
बरसात की एक सुहानी दोपहर थी।
आरव स्कूल से लौटते समय छोटी गलियों से होकर आ रहा था। उसके जूते कीचड़ से सने हुए थे, और बाल माथे पर चिपक गए थे।
अचानक उसे एक पुरानी, टूटी-फूटी दीवार में एक सुनहरा दरवाजा दिखा, जिस पर बहुत सुंदर अक्षरों में लिखा था:
“स्वप्नलोक पुस्तकालय — अपनी दुनिया खुद चुनो!”
आरव चौंका।
“मैंने पहले कभी इस गली में ऐसा दरवाजा नहीं देखा…” उसने सोचा।
किसी अदृश्य ताकत ने जैसे उसका हाथ पकड़ कर दरवाजे की ओर बढ़ा दिया।
धक्… धक्… धक्… उसका दिल तेजी से धड़कने लगा।
हिम्मत कर के उसने दरवाजा खोला।
स्वप्नलोक पुस्तकालय
अंदर का नज़ारा अविश्वसनीय था!
दीवारों तक ऊँचाई में फैली अलमारियाँ थीं, जिनमें लाखों किताबें रखी थीं।
कुछ किताबें हवा में तैर रही थीं, कुछ अपने आप पन्ने पलट रही थीं, और कुछ चुपके से फुसफुसा रही थीं।
बीच में एक आरामदायक कुर्सी पर एक बूढ़े दादा जी बैठे थे, जिनकी लंबी सफेद दाढ़ी थी और आँखों में चमक।
दादा जी मुस्कुराए और बोले,
“स्वागत है, छोटे यात्री।”
आरव ने घबराते हुए पूछा,
“यह…यह जगह क्या है?”
दादा जी हँसे,
“यह स्वप्नलोक पुस्तकालय है। यहाँ की हर किताब तुम्हें एक अलग दुनिया में ले जाती है। मगर याद रखो — जब तुम कोई किताब चुनोगे, तुम्हें उसकी कहानी पूरी करनी होगी।”
आरव का रोमांच चरम पर था।
वह एक अलमारी के पास पहुँचा, जहाँ मोटी नीली किताब रखी थी —
“उड़ता हुआ जंगल”

उड़ता हुआ जंगल
जैसे ही आरव ने किताब खोली, तेज़ रोशनी फैल गई और उसे महसूस हुआ कि वह कहीं और पहुँच गया है।
अब वह एक अद्भुत जंगल में था, जो बादलों के ऊपर तैर रहा था!
पेड़ हवा में झूम रहे थे, पत्तियाँ रुई जैसी थीं, और जानवर उड़ते हुए बातें कर रहे थे।
एक बंदर चिल्लाया,
“नई इंसानी बच्चा! देखो-देखो!”
एक तोता बोला,
“इसे उड़ते शेर से मिलवाना होगा।”
आरव मुस्कुराया लेकिन अंदर से डर भी रहा था।
कुछ देर बाद एक विशाल शेर उड़ते हुए आया। उसके सुनहरे पंख चमक रहे थे और गले में चमचमाती मणि लटक रही थी।
शेर गरजा,
“तुम कौन हो, और हमारे जंगल में क्यों आए हो?”
आरव ने साहस बटोरकर कहा,
“मैं आरव हूँ, और मैं दोस्ती करने आया हूँ।”
शेर ने अपनी नीली आँखों से आरव को देखा और बोला,
“अगर दोस्त बनना है, तो मेरी तीन चुनौतियाँ पूरी करो।”
चुनौती 1:
झरने के ऊपर से कूदते हुए एक उड़ते खरगोश को पकड़ना था।
आरव ने अपनी चपलता दिखाई और बड़ी मुश्किल से खरगोश को पकड़ लिया।
चुनौती 2:
पेड़ों पर चढ़ते हुए मधुर धुन बजानी थी, ताकि बादल नीचे आ जाएँ।
आरव ने अपनी मुँह से सीटी बजाई — और सचमुच बादल नीचे उतर आए!
चुनौती 3:
जंगल के सबसे ऊँचे पेड़ से एक चमकती हुई बेल तोड़नी थी।
आरव ने छलांग लगाई और बेल पकड़ ली।
शेर मुस्कुराया और बोला,
“अब तुम हमारे जंगल के मित्र हो।”
हवा में एक राह बन गई — और आरव फिर से पुस्तकालय लौट आया।

समय के पहिए
अब दादा जी ने उसे एक पुरानी घड़ी दी, और कहा:
“यह समय का पहिया है। अगली किताब चुनो!”
आरव ने किताब उठाई —
“समय के पहिए का रहस्य”
इस बार वह डायनासोरों के युग में पहुँच गया।
चारों ओर ऊँचे-ऊँचे पेड, विशाल जीव, और गरजते हुए ज्वालामुखी थे।
वहाँ एक छोटा डायनासोर बच्चा था, जिसे कुछ शिकारी पकड़ना चाहते थे।
आरव ने देखा कि बच्चा रो रहा था।
उसने सोचा,
“मैं इसकी मदद करूँगा!”
आरव ने पास की झाड़ियों में छिपकर एक योजना बनाई।
जब शिकारी आए, उसने चतुराई से पत्थर फेंककर उनका ध्यान भटका दिया।
फिर डायनासोर को अपनी ओर बुलाया और दौड़ते हुए एक गुफा में छुपा लिया।
बच्चे डायनासोर ने कृतज्ञता से अपनी नन्ही सी जीभ उसके गाल पर फेर दी।
कुछ देर बाद, एक चमकता हुआ द्वार खुला और आरव सुरक्षित वापस लौट आया।

खोया हुआ संगीत
अब बारी थी अंतिम किताब की:
“खोया हुआ संगीत”
इस बार वह एक उदास शहर में पहुँचा।
हर कोई चुप था — न कोई गाना, न कोई हँसी।
आरव ने एक बुजुर्ग से पूछा,
“यहाँ इतना सन्नाटा क्यों है?”
बूढ़े आदमी ने कहा,
“हमारा जादुई हारमोनियम चोरी हो गया है। जब तक वह वापस नहीं आता, हम गा नहीं सकते।”
आरव ने हारमोनियम को खोजने का प्रण लिया।
पहेली 1:
झील के नीचे एक सुरंग ढूँढनी थी।
आरव ने पानी में छलाँग लगाई और झील के अंदर एक चमकदार दरवाज़ा पाया।
पहेली 2:
एक भूलभुलैया में सही धुन बजानी थी, जिससे रास्ता खुले।
आरव ने अपनी किताबों में सीखी संगीत की ताल का इस्तेमाल किया और भूलभुलैया पार कर गया।
पहेली 3:
एक पहाड़ी के ऊपर जाकर एक पुराने मंदिर से हारमोनियम निकालना था।
बहुत संघर्ष के बाद, ठंडी हवाओं के बीच वह वहाँ पहुँचा और जादुई हारमोनियम ले आया।
जब उसने हारमोनियम बजाया, पूरा शहर गूंज उठा — बच्चे हँसने लगे, पक्षी गाने लगे और फूल झूमने लगे।

घर वापसी
तीनों साहसिक यात्राएँ पूरी कर के जब आरव पुस्तकालय लौटा,
दादा जी ने गर्व से कहा:
“अब तुम एक सच्चे यात्री हो, जिसने अपनी कल्पना और साहस से तीनों दुनियाओं को बचाया।”
उन्होंने आरव को एक छोटी सुनहरी चाबी दी और बोले:
“जब भी तुम्हें फिर से यात्रा करनी हो, यह चाबी दरवाजा खोलेगी।”
जब आरव बाहर आया तो वह दरवाजा गायब हो चुका था।
पर उसकी जेब में चाबी थी, और उसके दिल में ढेर सारी कहानियाँ।

Moral Of The Story
यह कहानी हमें सिखाती है कि कल्पनाशीलता, साहस और जिज्ञासा के माध्यम से हम न केवल नई दुनिया की खोज कर सकते हैं, बल्कि अपने अंदर छिपी शक्ति और अच्छाई को भी पहचान सकते हैं। आरव एक साधारण बच्चा होता है, लेकिन जैसे ही वह अद्भुत पुस्तकालय में प्रवेश करता है, उसकी जिज्ञासा उसे अद्भुत रोमांचों की ओर ले जाती है। हर अध्याय में वह नई चुनौतियों से जूझता है, डर का सामना करता है, और दूसरों की मदद करता है।
कहानी यह सिखाती है कि किताबें केवल पढ़ने के लिए नहीं होतीं — वे सोचने, समझने और बदलने की ताकत भी देती हैं। कल्पना की शक्ति से हम खुद को बेहतर बना सकते हैं और दुनिया को भी थोड़ा और सुंदर बना सकते हैं।
साथ ही, यह कहानी बच्चों को यह भी सिखाती है कि हर समस्या का हल हिम्मत, समझदारी और दयालुता से निकाला जा सकता है। आरव की यात्राएँ यह दिखाती हैं कि सीखना कभी खत्म नहीं होता — और हर किताब एक नई यात्रा का द्वार खोल सकती है।
अंततः, यह कहानी बच्चों को पढ़ाई, साहस, सहयोग और स्वप्न देखने की प्रेरणा देती है।
