अधूरी उड़ान से आसमान तक : एक प्रेरणादायक कहानी

Best Motivational Story : टूटी उम्मीदों का सफर

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव गजरौली में रहने वाला आरव एक साधारण किसान का बेटा था। उसका बचपन मिट्टी में खेलते और किताबों से सपने बुनते हुए बीता। गाँव में शिक्षा की सुविधाएँ सीमित थीं, लेकिन आरव की आँखों में बड़े शहरों की ऊँचाई छूने का सपना पलता था। उसका सपना था – एक पायलट बनना। आसमान को चीरते हुए बादलों के बीच उड़ना।

उसके पिता, हरिराम, दिन-रात खेतों में मेहनत करते थे और चाहते थे कि उनका बेटा पढ़-लिखकर कुछ बड़ा बने। लेकिन जब आरव ने पहली बार पायलट बनने की बात कही, तो हरिराम चुप रह गए। वे जानते थे कि उनके बेटे का सपना बहुत बड़ा है — इतना बड़ा कि उनके संसाधन उसे पूरा नहीं कर सकते।

आरव की माँ, कमला देवी, ने अपने पुराने गहने गिरवी रखकर उसे लखनऊ के एक कॉलेज में दाखिला दिलवाया। वह पढ़ाई में तेज़ था और साथ ही मेहनती भी। गाँव का हर बच्चा उसे देखकर प्रेरित होता था। लेकिन जिस दिन आरव ने अपने कॉलेज के प्रिंसिपल से पूछा कि क्या उसे पायलट बनने के लिए कौन-सी ट्रेनिंग करनी होगी, तब उसे पहली बार यह अहसास हुआ कि यह सपना सिर्फ पढ़ाई से पूरा नहीं हो सकता – इसके लिए पैसों की जरूरत है, बहुत ज़्यादा पैसों की।

Best Motivational Story : संघर्ष का मैदान

कॉलेज खत्म होते ही आरव ने दिल्ली की ओर रुख किया। वहाँ उसने एक एविएशन ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट की फीस जानी – पूरे 25 लाख रुपए। उसके पास एक भी नहीं था। लेकिन उसने हार नहीं मानी। वह एक ढाबे पर बर्तन धोने लगा, रात को सेकंड हैंड किताबों से पढ़ाई करता और दिन में इंटरनेट कैफे में रिसर्च करता।

रातें लंबी हो गई थीं, नींद अब एक मेहमान जैसी लगती थी। लेकिन आरव के भीतर एक आग थी – वह आग जो हार नहीं मानने देती। उसने कई एविएशन कंपनियों को ईमेल किए, खुद का रिज्यूमे तैयार किया, वीडियो बनाकर यूट्यूब पर डाले और मदद माँगी। ज़्यादातर ने जवाब तक नहीं दिया।

एक दिन जब वह ढाबे पर काम कर रहा था, एक बुजुर्ग व्यक्ति खाना खाने आए। उन्होंने देखा कि आरव प्लेटें धोते हुए अंग्रेज़ी में एविएशन के नोट्स दोहरा रहा था। उन्होंने रुचि ली और पूछा, “क्या पढ़ते हो बेटा?”

आरव ने बताया कि वह पायलट बनना चाहता है।

वह व्यक्ति मुस्कराया और बोला, “मैं कैप्टन शेखावत हूँ – रिटायर्ड एयर इंडिया पायलट।”

Best Motivational Story : किस्मत का दरवाज़ा

कैप्टन शेखावत ने आरव की मेहनत और जुनून को देखकर उसे एक स्कॉलरशिप प्रोग्राम के बारे में बताया – जो ऐसे ही होनहार लेकिन गरीब छात्रों के लिए था। आरव ने पूरी लगन से फार्म भरा, टेस्ट दिए और इंटरव्यू में अपना दिल खोलकर रख दिया।

कुछ हफ्तों बाद, आरव को एक कॉल आया – “आपका चयन हो गया है। आपको अमेरिका जाकर ट्रेनिंग करने का मौका मिल रहा है।”

गाँव में खुशी की लहर दौड़ गई। हरिराम ने अपने बेटे को गले से लगाया और आँसूओं के साथ कहा, “तू मेरा अभिमान है बेटा, उड़ जा अब।”

आरव अमेरिका गया, जहाँ उसने 18 महीनों की कठिन ट्रेनिंग पूरी की। वहाँ उसने सीखा कि उड़ान सिर्फ मशीनों की नहीं होती – मन की भी होती है। और मन की उड़ान तब तक रुकती नहीं, जब तक वह अपनी मंज़िल को न छू ले।

Best Motivational Story : उड़ान

एक दिन भारत लौटते समय, उसने प्लेन के कॉकपिट में बैठकर नीचे झाँका – बादलों के उस पार उसका गाँव, उसका खेत, उसके माँ-बाप और उसकी अधूरी उड़ान थी जो अब पूरी हो चुकी थी।

वह एक प्रतिष्ठित एयरलाइन का पायलट बन चुका था। जब पहली बार उसने लखनऊ से दिल्ली की फ्लाइट उड़ाई, तो उसी फ्लाइट में उसकी माँ और पिता भी सवार थे। उनकी आँखों में गर्व और खुशी के आँसू थे।

फ्लाइट के लैंड करते ही कैप्टन ने घोषणा की – “आज की फ्लाइट मेरे लिए विशेष है, क्योंकि इसमें मेरे जीवन के असली पायलट – मेरे माता-पिता बैठे हैं।”

सभी यात्री तालियाँ बजाने लगे।

Best Motivational Story : लौट के बुद्धू गाँव को आए

आरव ने नौकरी मिलने के बाद भी अपनी जड़ों को नहीं छोड़ा। उसने गाँव में एक फ्री एविएशन कोचिंग सेंटर खोला। उसका सपना था – और भी आरव पैदा हों, और भी सपनों को पंख मिलें।

गजरौली गाँव, जो कभी बिजली और पानी के लिए जूझता था, अब अख़बारों में छपने लगा – “जहाँ से उड़ती हैं उड़ानें”।

आरव ने साबित कर दिया कि संसाधनों की कमी सपनों की उड़ान को रोक नहीं सकती, अगर मेहनत, लगन और विश्वास हो।


सीख

“सपने वो नहीं जो सोते वक्त आते हैं, सपने वो हैं जो नींद को ही उड़ा दें।”
— डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

यह कहानी हमें सिखाती है कि:

  1. हालात कैसे भी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।
  2. परिवार का साथ और आशीर्वाद सबसे बड़ी ताकत होते हैं।
  3. हार मान लेना असफलता है, लेकिन कोशिश करते रहना सफलता की पहली सीढ़ी है।
  4. जब आप सफल हो जाएं, तो पीछे मुड़कर दूसरों के सपनों में भी रंग भरना मत भूलिए।

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